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" तिवारी साहब" की चवन्नियां

तिवारी साहब पन्डताइन को लिवाने ससुराल गए थे ! वहाँ इस बार बड़ा आनंद दायक माहौल था ! और वहां पर शेरो शायरी का कुछ अच्छा माहौल जम गया था ! आप भी तिवारी साहब की वहा पर सुनी सुनाई चवन्नी छाप शायरी की दो चवन्नियों का लुत्फ़ उठाइये ! पहली चवन्नी :- मैं सूंघ
 
दीपक "तिवारी साहब"