पसंद करें
2
नापसंद करें

पत्थर बना दिया !

सोचती हूँ अब भी  न जाने क्यों,वक़्त के थपेड़ों ने मुझेपत्थर बना दिया.थी तो मैं समंदर के किनारे की रेतजिसने रखे कदम दिल में समा लिया.प्यार के अहसास सेइतना सुख दियाहर आने वाले कोअपना बना लिया.अब मगर बात कुछ और हैबोले बहुत बोल ज़माने
 
रेखा श्रीवास्तव
टैग: पत्थर