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चिंताजनक प्रश्‍न है हंसते-खेलते सब तक पहुंचने वाले दु:स्‍वप्‍न अभी तक ऐसा क्‍यों है कुछ लफंगों की पहुंच में नहीं आ रहे?..

पता नहीं कुछ कैसे अभागे लोग हैं दुनिया कहीं से कहीं पहुंच जाएगी मगर ऐसे चिरकुटों की हाय-हाय का असहायगान बंद नहीं होगा कि भाई साहब, भाई साहब, सुना बिलासपुर तक में आ रहे हैं, फिर ऐसा कैसे है कि हमारी तरफ आने में अभी भी अवरोध बना हुआ है? मतलब कुछ करिये,
 
Pramod Singh
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तुम संग सिर अझुरा के मैं हार गई, सजना.. मतलब ऐ मेरे व्‍हॉटेवर..

द स्‍टोरी ऑफ़ अ हेयरी गर्ल: भाग दो लड़की छोटी थी तब बीच में रहते-रहते मां की चिंहुक सुना करती, ‘दुनिया में एक से एक छिंकाल पड़ी हैं, मेरे कोख से ही, मुई, इन बालों को बाहर आना था?’ लड़की सुनती और भृकुटि ऊपर चढ़ाये खिन्‍नमना भीतर ही भीतर ख़ून पीती चुप पटाई
 
Pramod Singh
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लड़की के बाल की खाल..

लड़की पता नहीं किस देश की थी, हालांकि वह दावे से हाथ झटकती बताती फिरती कि वह जानती है किस देश की है और इस बारे में किसी तरह की ग़लतफ़हमी बनाने की ज़रूरत नहीं, मगर उसके साथ यह भी उतना ही सही है कि उसके बालों का जिक्र छिड़ते ही लड़की का चेहरा भक्‍क सफ़ेद
 
Pramod Singh