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पांच करोड़ महामूर्खों का महाकुंभ

टन टन टन टन....। दिल्ली में आईटीओ के मेरे दफ्तर के आखिरी छोर पर बने एक छोटे से मंदिर में घंटियों की आवाज ने इस बार मुझे चौंका दिया। आमतौर पर मेरी शिफ्ट सुबह होती है और मैं 7 बजे यहां से गुजर रहा होता हूं। लेकिन तब मंदिर में घंटी नहीं बजती, पंडित जी दिखाई
 
राकेश परमार
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पांच करोड़ महामूर्खों का महाकुंभ

टन टन टन टन....। दिल्ली में आईटीओ के मेरे दफ्तर के आखिरी छोर पर बने एक छोटे से मंदिर में घंटियों की आवाज ने इस बार मुझे चौंका दिया। आमतौर पर मेरी शिफ्ट सुबह होती है और मैं 7 बजे यहां से गुजर रहा होता हूं। लेकिन तब मंदिर में घंटी नहीं बजती, पंडित जी दिखाई
 
राकेश परमार
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उल्लुओं से क्षमा याचना सहित...

एक पुरानी कहावत है कि 'जिस बाग़ में एक भी उल्लू डेरा डाल ले वो बाग़ सूख जाता है'। एक शेर अर्ज़ है - बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है,हर शाख़ पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा.
 
हर्ष प्रसाद
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पंडित जी, तुसी ग्रेट हो...

हमारे ऑफिस के बाहर एक पान का ठिया है। जहां पर कोई सिगरेट पीने और हम जैसे जो पान के शौकीन हैं वो पान खाने चले जाते हैं। यहीं पर खड़े होकर अधिकतर ऑफिस की राजनीति, खेल, हरियाली सभी तरह की बातें होती हैं। यहां पर एक 45-50 साल के शख्स बैठते हैं जिन्हें ल
 
Nitish Raj
टैग: पंडित