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बिखरे सितारे :भाग २: सैलाबे दर्द...

पिछले  भाग  में  पढ़ा :मकान मालकिन चाभी ले गयी, और पूजा पर गौरव औरभी गरज पडा..पूजा से बोला ना गया..बोलती भी तो उसकी कौन सुनता? उसने अपनी सास तथा जेठानी के मुखपे एक कुटिल -सी मुस्कान देखी. और फिर इसतरह के वाक़यात का एक सिलसिला-सा बनता गय
 
kshama
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एक बार फिर दुविधा ! ३७

जब मेरी यही लाड़ली बिटिया, अपना वास्तुशास्त्र मे अभ्यासक्रम पूरा कर , m. arch के लिए अमरीका जानेके तैय्यारीमे जुट गयी तो मेरा सीना छलनी, छलनी होने लगा। उस वक़्त हम लोग पुनेमे थे, जब वो ३रे वर्षमे आयी। उन्हीं दिनों उसका उसके भावी पतीस परिचय हुआ। दोनोन
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