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मन की का दर्द ...???

भाव विह्वल सजल नैनो में, अवसाद भरा ,कांपती है आत्मा थर्राती है नभ-धरा ।कैसी अनहोनी घटित हुई ,है जीवन में ,मात्र पात के स्पंदन से भी है ,ये!मन डरा ,सदियों की बातें करता रहा मै सदा ,सब कुछ विलुप्त हो गया ,बस पलक झपकी थी जरा ,क्यों नहीं भाता कोई आश्वासन मन
 
कमलेश वर्मा