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महिला थानों की हक़ीक़त

देश में भ्रष्टाचार ने किस तरह से अपने पाँव पसार रखे हैं और किसी भी अच्छे काम को किस तरह से पलीता लगाया जाना है इसका ताज़ा उदाहरण सीतापुर जनपद मुख्यालय पर स्थापित महिला थाने में देखने को मिला. जनवरी माह में लहरपुर में पढ़ने गयी एक लड़की अगवा की जाती है और
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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फ़ोन टैपिंग और सूचना का अधिकार

एक सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी के जवाब में यह बताया गया है कि फ़ोन टैपिंग से जुड़ी जानकारी भी गोपनीय है क्योंकि इसके द्वारा विशेष परिस्थितियों में कुछ फ़ोनों को टेप किया जाता है. गृह मंत्रालय ने साफ़ कहा कि सामान्य सूचना के तहत इस सूचना को
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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पेट्रोलियम पदार्थ और सब्सिडी...

आज कल जिस तरह से पेट्रोलियम पदार्थों को तर्कसंगत बनाने के लिए जो भी प्रयास किये जा रहे हैं उनका देश हित में बहुत जल्द लागू किया जाना ज़रूरी है क्योंकि जिस तरह से पिछले वर्ष देश की बड़ी तेल कम्पनियों को १ लाख करोड़ का नुकसान सिर्फ इनके तर्कसंगत मूल्यों के
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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भोपाल मुद्दे से भटकाव..

 अब भी शायद हमारे में से बहुत सारे लोग इतना भी नहीं समझ पायेंगें कि इस देश में कैसे विचार करने योग्य मुद्दों को  घटिया राजनीति में फंसा कर उसको मूल मुद्दे से भटका दिया जाता है. भोपाल कांड में जिस तरह से अब राजनीति ने सामने आकर असली मुद्दे को
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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माया का मायातंत्र ?

      देश में सबसे अजीबो गरीब फैसले लेने में माहिर माया सरकार ने आखिर में एक ऐसा मसला उठा दिया है जो लोकतंत्र में उनकी श्रद्धा और विश्वास पर ही प्रश्नचिन्ह लगाता है ? एक तरफ जहाँ लोकतंत्र को निचले स्तर तक पहुँचाने  की कवायद
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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आतंक, पाक और वार्ता

पाक के प्रधान मंत्री युसूफ राजा गिलानी ने कहा कि आतंक से शांति की वार्ता को अलग रखा जाना चाहिए क्योंकि इस बात का फायदा कुछ आतंकी संगठन उठा रहे हैं. इस तरह की बातें करने में पाक के नेता हमेशा से ही आगे रहे हैं. गिलानी की इस बात का क्या अर्थ लगाया जाए ? या
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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बंगाल और ममता दी

निकाय चुनावों में से तृणमूल कांग्रेस ने ज़बरदस्त प्रदर्शन करते हुए वाम दलों के ३४ साल पुराने किले में आखिर कार कब्ज़ा करने की तरफ एक कदम और बढ़ा ही दिया. जिस तरह से ममता दी को अप्रत्याशित सफलता मिली उससे यूपीए में उनका क़द तो बढ़ ही गया साथ ही अन्य दलों पर
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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डाकू और हरियाली

उत्तर प्रदेश के औरैया में पारिस्थितिकी पूरी तरह से बिगड़ने के कगार पर है पहले किसी समय यहाँ पर स्थानीय पेड़ पौधों खैर, करौंदा, छोटी बबूल, शीशम और कैथा की बहुतायत मिलती थी पर जंगलों से डाकुओं का सफाया होने के बाद वन माफियाओं ने इन इलाकों में घुसना शुरू कर
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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काश हमें भी कोई विधायक, सांसद बना दे अथवा बनवा दे

रोज-रोज की बिजली पानी की चकचक देखकर हालत खस्ता हो जाती है। अधिकारियों को फोन करो तो मोबाइल बजता ही रहता है पर कोई उठाता नहीं है। सारे अधिकारियों को आदेश हैं कि सरकारी मोबाइल बन्द न किये जायें सो वे बन्द तो नहीं करते हैं पर उठाते भी नहीं हैं। एक बिजली की
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आओ दागी दागी खेलें....

आखिर कार बसपा ने भी अपराधी छवि वाले विधायकों और सांसदों के खिलाफ घुटने टेक ही दिए. जिस तरह से माया ने अपने सभी वर्तमान विधायकों को फिर से टिकट देने की घोषणा की उससे तो यही लगता है कि कभी पार्टी में निरंकुश राज करने वाली नेता को भी इन बाहुबलियों की ताकत
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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बिजली विभाग की लापरवाही..

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक गाँव में नहर में हाई टेंशन तार के गिर जाने से ५ बच्चों की दर्दनाक मौत हो गयी. क्या कारण है कि हम आज भी अपनी आवश्यकताओं की चीज़ों में सुरक्षा की कमी महसूस करते रहते हैं ? क्यों देश भर से बच्चों के बोरवेल में गिरने की
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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उत्तर प्रदेश का क्या होगा ?

नेताओं के झूठ बोलने की प्रवृत्ति के आगे लगता है पूरा उत्तर प्रदेश बेबस है... ऐसा नहीं है कि पूरे देश में बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता पूरी हो रही हो पर जिस तरह से उत्तर प्रदेश में बुरा हाल चल रहा है वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. आज पूरे
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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मंत्रियों की असहमति....

इधर कुछ समय से देखा जा रहा है कि सरकार में रहकर नीतियों से विरोध करने का एक चलन सा होता जा रहा है. देश को चलाना एक ज़िम्मेदारी होती है पर जब इस ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों को इतनी छूट दे रखी हो तो उन्हें भी
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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राजीब सुक्ला का दुख भरा दास्तान!!

आज भोरे भोरे जब हमरी सिरीमती जी हमरे लिए चाह बनाकर लाईं, त हाथ में “दैनिक जागरण” धरा कर चली गईं. चाह का चुस्की के साथ, हम अखबारो चाटने लगे, खासकर बिचलका पन्ना. ई पन्ना पर बड़ा बड़ा लोग का छोटा छोटा आर्टिकिल छपता है, जिसको पढकर असली खबर मालूम होता है. माने
 
चला बिहारी ब्लॉगर बनने
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हमें हिसाब चाहिए...

माननीय सांसदों ने बजट सत्र के ११५ घंटे हंगामे में बर्बाद कर दिए कुल मिलाकर लोकसभा में ३६.६ % और राज्यसभा में २८ % समय इस तरह के हंगामे की भेंट चढ़ गया. अगर संसद में कोई निर्णय लेने के स्तर तक हमारे नेता पहुँच ही नहीं सकते तो उन्हें वहां पर जाने की क्या
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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देश की लोकसभा कुत्तों के हवाले किसने करी?

The parliament has gone to the dogs. देश कि संसद की ज़िम्मेदारी होती है कानून पर बातचीत करना और अपनी सम्मति से पेश हुये बिलों को कानून का दर्जा देना. इस देश की जनता की ज़िम्मेदारी थी वहां ऐसे सज्जन और जागरुक व्यक्तियों को भेजना जो ज्यादा से ज्यादा बिलों को
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तुगलकी फ़रमान

उत्तर प्रदेश में बाढ़ पीड़ित जिलों में सरकार ने मध्याह्न भोजन योजना को गर्मी की छुट्टियों में भी चलाने का आदेश जारी कर दिया है. निश्चित तौर पर बाढ़ पीड़ितों के लिए यह एक राहत होगी पर इतने बड़े सरकारी ताम झाम और लाव लश्कर के बाद भी इस तरह की योजनाओं को
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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भारत बंद

आपने भी सुना होगा, देखा होगा या महसूस किया होगा। कुछ दिनों पहले भारत बंद था।ये मत समझिएगा की भारत बंद का मतलब भारत दूसरों के लिए बंद था।पकिस्तान से आने वाले आतंकियों के लिए भारत बंद नहीं था। वो अपने च्वाइस के रास्ते से भारत आ सकते हैं (चाहे कश्मीर के
 
स्पाईसीकार्टून
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पार्क में एक सुहानी सुबह की कहानी

गर्मी के दिनों की सुहानी सुबह के समय पार्क में काफी रौनक है। एक पत्रकार का आगमन। किसी ने कोई परवाह नहीं की। पांच सात जनों ने दूर से हाय हैल्लो किया बस। उसके मित्र कुछ क्षण उसके पास रुके। वहीँ हवा खोरी करने एक बड़ा सरकारी अफसर आ गया। बहुत से लोग घूमना छोड़
 
नारदमुनि
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महंगाई लोकसभा में जीत गई और आम आदमी के लिए लडऩे वाले हार गए

और महंगाई जीत गयी। लोकसभा में महंगाई के पक्ष में वे भी मत देते देखे गए जो महंगाई के विरुद्ध हैं। लोकसभा के बाहर जिन 13 दलों ने महंगाई के विरोध में भारत बंद का आव्हान किया था उममें से कुछ महंगाई के विरुद्ध कटौती प्रस्ताव पर मत देने के लिए सहमत नहीं हुए।
 
विष्णु सिन्हा
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पता ही नही चलता कि भिखारी कौन और दाता कौन है---

कहते हैं --एक मच्छर आदमी को क्या से क्या बना देता है । इसी तरह एक छोटी सी पिन कंप्यूटर का बेडा गर्क कर देती है । ये तो हमने अभी जाना । अब हुआ यूँ कि हम ज़नाब की सफाई करने बैठे और की बोर्ड का तार निकाल कर जब दोबारा डालने लगे तो ज़रा चक्कर खा गए। लगे अक्ल
 
डॉ टी एस दराल
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विधान सभाओं की सीमा...

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने  जो व्यवस्था दी वह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मामले में विधान सभा ने अपने अधिकारों से परे जाकर कैप्टन को निष्कासित कर उनकी
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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हंगामा ही रहता है बरपा, संसद सत्र है जब चलता...

देश की संसद में इस समय आई0पी0एल0 को लेकर हंगामा मचा हुआ है। पिछले सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर हंगामा मचा हुआ था। अब पता नहीं कि अगले सत्र में किस बात पर हंगामा हो?देखने में आया है कि अब संसद में लगभग पूरे सत्र किसी एक ही बिन्दु, किसी एक ही विषय
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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क्रिकेट की लोकप्रियता और अथाह धन विवाद पैदा करे तो आश्चर्य की बात नहीं

हमारे देश में मुख्य मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी, जल है या क्रिकेट। किसी भी तरह के मीडिया को देखें, पढ़ें, सुनें तो मुख्य मुद्दा क्रिकेट ही दिखायी देता है। कल तक क्रिकेट सिर्फ सट्टेबाजी के लिए मशहूर था। मैच फिक्सिंग के लिए कभी क्रिकेट के कप्तान अजहरुद्दीन पर
 
विष्णु सिन्हा
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इस रंग बदलती राजनीति में, इंसान की कीमत कोई नहीं...

राजनीति में सिद्धान्तों की राजनीति तो समाप्त हो गई और सिद्धान्त विहीन राजनीति की शुरुआत होने लगी। किसी भी स्थिति के सिद्धान्त क्या होगे और कब तक वे लागू रहेंगे यह एक प्रश्न हो सकता है किन्तु हमारा मानना है कि सिद्धान्त वही होते हैं जो कभी बदलते नहीं या
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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लोकतांत्रिक देश में धरने प्रदर्शनों के लिये कोई जगह नहीं

हम लोग कई  बार जब दिल्ली में घूमने के लिये निकलते समय अगर कनॉट-प्लेस के पास स्थित जंतर मंतर पर पहुंच जाते हैं तब वहां पर देखते हैं कि वहां पर सड़क के दोनो और कई प्रकार के धरने और प्रदर्शन चल रहे होते हैं, जिन कई व्यक्ति और संगठन अपनी विभिन्न मांगो
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उ० प्र० में अब चेती सरकार...

नक्सली हमले के बढ़ते खतरों के बीच आखिरकार उत्तर प्रदेश सरकार की समझ में यह आ ही गया कि इस तरह के अभियानों में कहीं न कहीं खुफ़िया तंत्र की मज़बूती का बहुत बड़ा योगदान होता है. उच्च पुलिस अधिकारियों ने अपनी बैठक में यह तय किया है कि अब थाने के स्तर पर भी
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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नेता की मृत्यु पर राजकीय या राष्ट्रीय शोक मनाया जाता है क्या शहीद इसके भी हकदार नहीं हैं

देश की रक्षा में रत छत्तीसगढ़ में केंद्रीय बल के जवानो की दुर्दांत हत्या और उनके संबंधियों और जनता के आँसू अभी सूखे भी नहीं हैं . सारा देश जहाँ शोकग्रस्त है, वहीं आज राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कारों का वितरण ?
 
डॉ महेश सिन्हा
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जाति भी पूछो साधु की

जाति भी पूछो साधु की- अपने देश में हर दसवें साल जनगणना कराने की परम्परा है. इसी साल १ अप्रैल से नयी जनगणना प्रारम्भ होगी. १८७२ में पहली बार इस देश में जनगणना हुई थी. तब से अब तक १४ बार जनगणनाएं हो चुकी हैं. भारत में जनगणना कोई नयी बात नहीं है. प्राचीन
 
मिहिरभोज
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नेता विज्ञापन माडल क्यों बनते हैं

नेता विज्ञापन माडल क्यों बनते हैं वीरेन्द्र जैन आप कोई सा भी अखबार उठा कर देख लीजिए इनमें प्रति दिन कोई ना कोई नेताजी किसी शो रूम, होटल, हास्टल, स्कूल, नर्सिंग होम, सड़क, फुट्पाथ, मेला, यहाँ तक कि पेशाब घर तक के हिन्दू रीति रिवाज़ से भूमि पूजन या फीता काट
 
वीरेन्द्र जैन
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रघुवंशी मामला..

महाराष्ट्र आतंकरोधी दल के प्रमुख रघुवंशी को हटाये जाने के पीछे बहुत सारे तर्क प्रस्तुत किये जा रहे हैं. बात चाहे जो भी हो पर क्या इतने महत्त्वपूर्ण पद पर बैठे हुए व्यक्ति को अपने विभाग की इतनी छोटी सी बात भी नहीं पता है कि मीडिया के सामने क्या बातें करनी
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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सांसद संसद और साइकिल

बीजू जनता दल के सांसदों ने पर्यावरण पर जागरूकता पैदा करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से जब अनुमति मांगी थी तो लोगों ने सोचा कि शायद यह भी एक राजनैतिक शोशा ही हो पर मीरा कुमार को यह विचार इतना पसंद आया कि उन्होंने सुरक्षा विभाग से तुरंत ही इस पर सारी बातें देख
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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बन्दूको की सलामी और जोकरई

अंग्रज़ों ने अपने समय के छुटभइए राजाओं को उल्लू बनाने के लिए तोपों की सलामी-प्रथा शुरू कर रखी थी. जो अंग्रेजों का जितना बड़ा पिट्ठू उसे उतनी ही ज़्यादा तोपों की सलामी. ये जोकर राजा इसी बात पर मूछों पर ताव दिए घूमते थे कि देखा उन्हें कितनी ज़्यादा तोपों
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माला की "माया" में आयकर विभाग भी ?

दलित और दबे कुचले लोगों की बात करने वाली दलित की बेटी कहलाने वाली और मनुवादियों पर हमेशा ही प्रहार करने वाली माया को लगता है कि इस बार १५ मार्च को पहनाई गयी माला बहुत भारी पड़ने वाली है. वैसे देखा जाये तो इस तरह के आयोजनों में इस तरह की मालाएं और मुकुट
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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आज तो हमारा शेर गुर्राया......जय हो

  आज बङे बङे अक्षरों मैं देश के सभी अखबारों मैं इस आशय का हमारे वित्त च्च….. च्च...सौरी……ऊं…हूं…. गृहमंत्री का ...कथन छपा है कि .....हम अब आतंकवाद को सहन नहीं करेंगे....और जवाबी कार्यवाही भी कर सकते… बहुत दिनों बाद किसी राजनेता का इस तरह का कथन
 
मिहिरभोज
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छत्तीसगढ़ में निलंबन...

राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक प्रस्तुत करने पर हंगामा करने वाले सांसदों को जिस तरह से निलंबित किया गया था वह बिलकुल ठीक था आखिर देश की लोकतान्त्रिक मर्यादा को बचाए रखने के लिए इस तरह की सख्ती अब बहुत आवश्यक हो गयी है. इसी घटनाक्रम की ताज़ा कड़ी में
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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उत्तर प्रदेश की माया ...

उत्तर प्रदेश में जिस तरह से पुलिस प्रशासन और सरकार काम कर रहे हैं उसे देखकर तो अच्छे अच्छों को भी चक्कर आने लगें. लखनऊ में होली के दिन जिस तरह से ४ बच्चों को माया के पोस्टर पर कालिख पोतने के मामले में हिरासत में लिया गया उसने बर्बरता की सारी मिसालें तोड़
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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सरस्वती न सही लक्ष्मी तो मेहरबान है!

(एक दैनिक पत्र के ऑन-लाइन संसकरण में प्रकाशित इस वैचारिक-समाचार को पढ़ें और सोचें कि क्या ऐसे लोग ही इस देश का उद्धार कर सकेंगें ?)शुरुआत करते हैं अक्षय प्रताप सिंह से। एक राजघराने से ताल्लुक रखते हैं। प्रतापगढ़ के सांसद भी रहे हैं और बुधवार को वह राज्य
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सवाल तो पूछ ही लो...

हमारे नेताओं ने देश के सामने बड़ी विचित्र स्थिति उत्पन्न कर दी है, वे संसद में अपना सवाल तो प्रश्नकाल के लिए लगा देते हैं पर जब प्रश्न पूछने का समय आता है तो वे संसद से ही गायब हो जाते हैं. आज जिस तरह से इन नेताओं द्वारा संसद की गरिमा को रोज़ ही ठेस
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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हमारे नेता जी !

अरे नेता जी तो नेता हैं, वो नव रसों के जानते वाले हैं। नेताजी डराते भी हैं और मस्ती में झुमने पर मजबूर भी कर देते हैं। इ‍टावा से विधायक एक इंजीनियर को रौद्र रुप दिखाते हैं धमकाते हैं कि दूसरा औरेया कांड कर देगें। वही औरेया कांड जिसमें एक विधायक ने इस
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