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निरुपमा केस - एक प्रेमी की निगाह से

निरुपमा पर जब पिछली पोस्ट लिखी थी तब, ज़ाहिर तौर पर, बेहद व्यथित था…अब भी हूं…पिछली पोस्ट में एक पिता की तरह चीज़ों को देखने की कोशिश की थी…इस बार प्रेमी की तरह देखना चाहता हूं। मेरे एक दोस्त थे…गोरखपुर के…साथी कार्यकर्ता भी…उन्हें भी प्रेम था…लड़की के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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साहस उतना ही दिखाना चाहिए जितना हममे है ....विचारों का बवंडर

PLEASE VISIT www।praharilive.com and help Kanishka Kashyap with your suggestions.निरुपमा की मौत ने इंसानियत और नारी विकास के दिखावटी सत्य को धराशायी कर दिया है ...नर और नारी सभी दुखी है ...होना भी चाहिए ...जाने कितना क्या कुछ लोग लिखते जा रहे हैं ...मगर
 
वाणी गीत
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मैं और क्या करुं निरुपमा?

निरुपमा केवल उस लड़की का नाम नहीं रहा अब जो एक पत्रकार थी, जिसके लिये उसका परिवार बेहद प्रिय था, जो प्रेम करती थी…जिसे प्रेम करने की सज़ा मिली…अब यह नाम उन तमाम लड़कियों का है जो इस ग़लतफ़हमी का शिक़ार हो जाती हैं कि प्रेम दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत चीज़ है
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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बेटी को कमज़ोर समझने वाले बहुत नीच होते हैं

शेष नारायण सिंह नयी दिल्ली के एक अखबार में काम करने वाली एक लड़की को उसके घर वालों ने मार डाला. वह झारखण्ड से अपने सपनों को साकार करने के लिए दिल्ली आई थी. जहां उसने देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान से पढाई की और एक सम्मानित अखबार में नौकरी कर ली.
 
शेष नारायण सिंह