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निमंत्रण

फाटक बाबू को मिला निंमंत्रण खाने को उस पार्टी में लिखा हुआ था काला कोट पहन कर जाने को उस पर्टी में पहुंचे जब सज-धज कर फाटक लोग अचंभे खड़े रहे प्याला होठों तक पहुंच न पाया नज़र उन्हीं पर जड़े रहे महफ़िल में जब नज़र घुमाई तो फाटक जी बेहद शर्माए थे देखा लोग
 
हास्यफुहार
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क्या कोई बता सकता है ---इन शादी के कार्डों का क्या किया जाये ?

सर्दियों का मौसम , यानि शादियों का मौसम । शादियों का मौसम यानि परेशानियों का मौसम। जी हाँ, दिल्ली की पौने दो करोड़ जनता और शादियों के लिए महज़ कुछ गिने चुने दिन। क्या करें भाई , हम दिल्ली वाले हैं ही ऐसे की बिना पंडित की आज्ञा के शादी की तिथि निश्चित
 
डॉ टी एस दराल