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चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो

जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ... यह  हमसे  न होगा ! अपने  मुँह मियाँ  मिट्ठू... वाः वाः
 
डा. अमर कुमार
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भईया, तनि हमारौ एकु फोटू चीन्ह देयो

पहेली बूझाने मैं तो आयी.. कहते हैं इसको चीन्हा-चिन्हाई ! चीन्हा-चिन्हाई ... चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू ब्लागिंग भई है, बमचिकाचिक...  त हमहूँ भये हैं, बमचिकाचिक । बमचिकाचिक देखो फोटू बमचिकाचिक ! चीन्हा-चिन्हाई ... चीन्हा-चिन्हाईऽऽ..
 
डा. अमर कुमार