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आज मंगलेश जी का जन्मदिन है ...

होने के प्रमाण मंगलेश जी के बग़ैर दृश्य की कल्पना नहीं की जा सकती और यह सिर्फ़ साहित्यिक दृश्य नहीं है. यह जीवन, संघर्ष और सौन्दर्य का दृश्य है. यह मेरी ज़िन्दगी का दृश्य है. यह बात कितनी भी भावुक या अजीब लग सकती है लेकिन मंगलेश जी को समझने के बाद कोई
 
शिरीष कुमार मौर्य
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भुतहा मकान के बाहर : मुक्तिबोध के लिए - हरि मौर्य

यह मेरे पिता की कविता है, कमाल की बात ये कि इसे उन्होंने 63 वर्ष की उम्र में लिखा है। उनके अतीत में बहुत पीछे 1962-63 के ज़माने में यानी उनके छात्रजीवन में कभी कहीं कुछ कविताएं थीं और भाऊ समर्थ,रामेश्वर शर्मा, नागार्जुन आदि से उनपर मिली ख़ूब प्रशंसा भी।
 
शिरीष कुमार मौर्य
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आज हमारे हिस्से का महिला दिवस है !

पता नहीं क्यों ...... पर आज ये एक अटपटी और बेहद निजी पोस्ट... इस थोड़ी-सी कैफ़ियत के साथ...१९९९ के बसंत में मित्र से जीवनसाथी बनने जा रही सीमा हर्बोला ने तय किया था कि शादी महिला दिवस के दिन करेंगे ....कोर्ट में अर्ज़ी लगायी पर एस० डी० एम०
 
शिरीष कुमार मौर्य
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