हम नालायक बेटे
कोई नहीं आया दरवाज़े परपिता की प्रतिष्ठा बढ़ानेसारे विवाह गीत मां के होठों में दबे रह गयेनहीं मिला बुआ को जड़ाऊ हारदोस्तों की सारी रात नाचते रहने की तमन्ना अधूरी रह गयीभाई तरसता रहा सहबाला बनने कोगहनों की आकांक्षा तो शायद उसको भी थीजिसके दरवाज़े पर नहीं
May 14 2010 11:00 AM



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