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नारी

नारी सौंदर्य भरा अनंत अथाह,इस सागर की कोई न थाह .कैसे नापूँ इसकी गहनता,अंतस बहता अनंत प्रवाह .ज्योति प्रभा से उर आप्लावित,प्राण सहज करुणा से द्रावित .अंतर्मन की गहराई में,प्रेम जड़ें पल्लव विस्तारितसरल हृदय संपूर्ण समर्पित,कण- कण अंतस करती अर्पित .रोम -
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नारीसौंदर्य भरा अनंत अथाह,इस सागर की कोई न थाह .कैसे नापूँ इसकी गहनता,अंतस बहता अनंत प्रवाह .ज्योति प्रभा से उर आप्लावित,प्राण सहज करुणा से द्रावित .अंतर्मन की गहराई में,प्रेम जड़ें पल्लव विस्तारितसरल हृदय संपूर्ण समर्पित,कण- कण अंतस करती अर्पित .रोम -
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दोमुहे जानवर (कहानी)

सच में घुटन होती है इस समाज में इनलोगों के बीच ..मुग्धा ने अपने चेहरे से पसीना पोछते हुए सोचा,वो अभी भी पसीने से भीगी अपनी पीठ पर मिस्टर शुक्ला की निगाहें महसूस कर रही थी उस आदमी को देख कर हमेशा मुग्धा को लिजलिजापन महसूस होता है ...जैसे भाव छिपकली को देख
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जितनी बार टूटी मैं

"मैं तो खुश थी अपनी गुडिया के साथकहाँ माँगा था सारा आकाशगुड्डे के साथ डोली चढ़ बैठी नन्ही सी गुडिया गोद में आ बैठी मैं तो फिर भी खुश थी अपने नन्हे सोते जागते खिलौनों के साथ मैंने तो नहीं माँगा था कभी कोई पारिजात तुमने हाँथ  बढ़ाये तो मुझे
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हे ईश्वर इन्हें माफ़ करना...

शिया धर्म गुरु कल्‍बे जव्‍वाद का यह बयान बेहद शर्मनाक है कि महिलाएं सिर्फ़ बच्‍चे पैदा करें, राजनीति उनका काम नहीं है. जिस समाज के 'ठेकेदार' ऐसे हों, वह समाज किस दिशा (गर्त) में जाएगा, कहने की ज़रूरत नहीं. हालांकि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अनेक गैर
 
फ़िरदौस ख़ान
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आप नहीं समझेंगे

आप नहीं समझेंगे ,आपको कभी किसी ने घर से निकलने से पहले रोका नहीं ,आपके कुरते के गले की गहराई पर किसी ने टोका नहीं जब आप सड़क पर निकले किसी ने सीटी बजाई नहींबिना बात आपके चरित्र पर कभी ऊँगली उठाई नहीं आप नहीं समझेंगे ......आपको किसी ने बोझ की तरह देखा नहीं
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जनाना राज चला गया है या आ रहा है?

वे पढ़ीलिखी है. न भी है तो भी अर्थार्जन करती है. कार्यालय जाती है, शाम को घर लौटती है मगर उसे पुरूषों वाली सुविधा नहीं मिलती. अगर पुरूष सिगरेट पी सकता है तो आप भी पी सकती है. सिगरेट पियें, दारू पियें, चरस लें. मगर आजादी के नाम पर नहीं.
 
संजय बेंगाणी
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महिलाओं का ब्लॉग एग्रीगेटर

यहाँ क्लिक करिये सूचना प्राप्त हुई नारी ब्लॉग से
 
डॉ महेश सिन्हा
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एसेंशियल टिचिग्स ऑफ़ हिन्दुइज्म

मनुस्मृति मे कहा गया कि स्त्री की जीवन भर रक्षा करनी चाहिऍ। इसे, स्त्रियो की स्वतन्त्रता का विरोधि और उन्हे गुलाम मानने की भ्रान्ति पैदा हो गई। है। इस भ्रान्ति का विरोध करते हुऍ अग्रेजी की महिला ग्रन्थाकार केरी ब्राउन ने अपने "एसेंशियल टिचिग्स ऑफ़&nb
 
MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर
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मजे करो! नाबालिग से विवाह अपराध नहीं

किसी नाबालिग लड़की से निकाह करना अपराध नहीं होगा क्यों कि इस परिस्थिति में नाबालिग लड़की शारीरिक सम्बन्ध बनाने या माँ बनने के लिए पूर्णतः परिपक्व होगी. क्या मेरी बात आपको बकवास लग रही है?
 
संजय बेंगाणी
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कूविचारों के साथ सक्रिय लोग

नारी नर्क का द्वार है या दलित की परछाईं भी छू जाए तो अपवित्र हो जाते है जैसी बातें मानने वाले लोग आज भी मिल जाएंगे. ऐसे ही एक विचित्र से सिद्धांत को लेकर जीने वाला समुदाय है अनूप मण्डल.
 
संजय बेंगाणी
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एक संबाद - आखिर कब तक

रश्मि :- अरे लक्ष्मी क्या का रही है? लक्ष्मी :- कुछ नही दीदी खाना बनाने की तयारी और का| रश्मि :- का - का बनाएगी आज देखूं तो भला, अरे ये सब तो अभी काफी मंहगी होगी न कैसे दी? लक्ष्मी :- जी दीदी, ३० रु. सेर, उनको बहुत पसंद थी न सो ले ली| रश्मि :- चल ठीक
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देवी बनाकर लुटा

सबसे ज्यादा नारी पूजा हमारे देश में होती है या यह कहें सिर्फ यहीं होती है :- और सबसे ज्यादा नारी अपमान भी शायद कब थमेंगे ये अनमोल रत्न भगवान में आस्था रखने वाले कहते हैं न सबसे बड़ा शक्तिमान है भगवान, और मनुष्य क्या जिसने सबको देवी बना कर लुटा ......
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मैं नारी हूँ.

सदियों से सताई गई, जलाई गई, अग्नि परीक्षा देती,मैं शकुन्तला, मैं सती, मैं ही सीता हूँ,मैं नारी हूँ...मैं जगत जननी हूँ, मैं विनाशनी हूँ,मैं अर्धनारीश्वर की सहभागिनी हूँ,मैं नारी हूँ....अहिल्या की पवित्रता मैं, उमराव की पतिता मैं,गंगा की निर्मल धारा मै
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