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गजनी, डीजी खान फिर गाजीपुर

“ अगर “अली” को “गढ़” से, “गाजी” को “पुर” से और “दिलदार” को “नगर” से अलग कर दिया जाएगा तो बस्तियां वीरान और बेनाम हो जाएंगी और अगर “इमाम” को “बाड़े” से निकाल दिया गया तो मोहर्रम कैसे होगा ! ” संबंधित कड़िया-1.गजनी, गजनवी और गजराज.2.माई नेमिज खान बहादुर
 
अजित वडनेरकर
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[नामपुराण-13] श्रोता से श्रोत्रिय तक…

... श्रोता से नजदीकी रिश्ता है श्रोत्रिय का। प्राचीनकाल में ज्ञानार्जन का जरिया श्रौतकर्म अर्थात श्रवण, मनन और चिन्तन ही था ... ब्राह्मणों के चिर-परिचित उपनामों या सरनेम में श्रोत्रिय का शुमार भी है। विद्याव्यसन और अध्यापन से ही जुड़ा हुआ शब्द है
 
अजित वडनेरकर
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गरारे, खर्राटे, गार्गल और गर्ग

पिछली कड़ी-अजगर करे न चाकरी…  खां सी होने या गला खराब होने की स्थिति में अक्सर गरारा करने की नौबत आती है। गौरतलब है कि गरारा के लिए अंग्रेजी में भी इससे मिलता जुलता शब्द है गार्गल जिसका अर्थ है कुल्ला करना, गरारे करना आदि। गरारा यानी गर्म पानी के
 
अजित वडनेरकर
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बस्ती बस्ती, कटरा कटरा[आश्रय-29]

... ताजा कड़ियां- कसूर किसका, कसूरवार कौन? [आश्रय-26].सब ठाठ धरा रह जाएगा…[आश्रय-25] पिट्सबर्ग से रामू का पुरवा तक…[आश्रय-24] शहर का सपना और शहर में खेत रहना [आश्रय-23] क़स्बे का कसाई और क़स्साब [आश्रय-22] मोहल्ले में हल्ला [आश्रय-21] कारवां में वैन और
 
अजित वडनेरकर
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बिकट रूप धरि….

विकट शब्द का मुहावरेदार प्रयोग भी बोलचाल में होता है जैसे विकट आदमी या विकट मनुष्य। क ठिन या मुश्किल के अर्थ मे हिन्दी में विकट शब्द का प्रयोग होता है। मूलतः विकट में कठिनाई कम और विस्तार ज्यादा है अर्थात विकट शब्द गुणवाची कम और परिमाणवाची ज्यादा है।
 
अजित वडनेरकर
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भुजबल और बाहुबली का बांहें चढ़ाना..

  हि न्दी में बांह चढ़ाना मुहावरा खूब चलता है जिसका अर्थ है ताव में आना, आमना-सामना करने की तैयारी, किसी को चुनौती देना या किसी की चुनौती स्वीकार करना। हिन्दी में जो बांह शब्द है वह मूलतः इंडो-ईरानी भाषा परिवार से आ रहा है। बांह का एक रूप बाज़ू
 
अजित वडनेरकर