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नाम खोजती एक कविता

तुझको कैसे बतलाये हम, जाने क्या-क्या भूल गए,तेरी आँखे याद रही बस, तेरा चेहरा भूल गए .हँसना अपनी फितरत है, सो हँस कर आंसू पीते हैं,तेरी खातिर कितना तडपे, तुझे बताना भूल गए.कल तक तुझको मिल जाएगी, चिट्ठी डाल के सोचा थाघर पहुंचे तो याद आया, पता तो लिखना भूल