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नव स्पंदन स्वीकार करो
इस नव वर्ष के अभिनन्दन को मैं बोलो क्या श्रिंगार करूँ पुष्प सजाऊं धुप जलाऊं चन्दन अंगीकार करूँ नूतन वर्ष है नूतन योवन नूतन भाव सजे हैं स्वप्न स्वप्नों में तुम आन बसे प्रिय नव स्पंदन स्वीकार करो नव क्षण का उत्साह अमित है सब कुछ शुभ शुभ लगता है इस पावन
Mar 16 2010 11:09 AM



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