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नव स्पंदन स्वीकार करो

इस नव वर्ष के अभिनन्दन को मैं बोलो क्या श्रिंगार करूँ पुष्प सजाऊं धुप जलाऊं चन्दन अंगीकार करूँ नूतन वर्ष है नूतन योवन नूतन भाव सजे हैं स्वप्न स्वप्नों में तुम आन बसे प्रिय नव स्पंदन स्वीकार करो नव क्षण का उत्साह अमित है सब कुछ शुभ शुभ लगता है इस पावन
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वळणावर…

अडखळते पाऊल सरत्या वाटे वळणा, मी पाहतो वळून मागे सुटलेल्या पाऊलखुणा. वळण शेवटचे या वाटेवरचे, रात्र शेवटची, वाट नवीन, पहाट नवीन उद्यापासूनची. धुळी भरल्या वाटा गेल्या, ऋतू आले आणि गेले, सरल्या हीच जाणिव, सरले म्हणून कळले. वळणावरचे वाटसरु, सोबत कुणी न
 
अरुण
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“ सहज..2010..”

नए साल पर लिखना चाहिए कुछ..इतना तो बनता ही है..यार..!2009 जा चुका है. कहाँ कुछ चला जाता है..? कुछ नहीं जाता...सब कुछ यहीं रहता है..चेहरे पे, नसों मे, बहता रहता है...मेरी प्रतिक्रियाएँ बताती हैं मेरी हालत..। कुछ देखने-टोकने की आदत जाती नहीं..क्या करूँ..?
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
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मी, नववर्ष आणि नवं संकल्प!!!

नववर्ष्याचे संकल्प हे मोडण्यासाठीच असतात असं कुणी करी म्हटलंय.. आता नक्की आठवत नाही कोण म्हणालं ते, पण ते महत्वाचं नाही, म्हणणं महत्वाचं आहे. तर आज त्या विचाराची आठवण येण्याच कारण म्हणजे सालाबाद प्रमाणे मी यंदाही काही संकल्प योजले आहेत.
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वर्ष २०१०: साहित्यकारों की राय- 'दिन नहीं बदलेगा, तारीख़ बदल जायेगी'

नए साल के मौके पर बतौर कर्मकांड जीवन के चकमक क्षेत्रों के जगमगाते लोगों से यह जानने की कोशिश की जाती है कि उनकी क्या-क्या उम्मीदें हैं. हमने तय किया कि इस बारे में धूल-धूसरित हिन्दी जगत के नए-पुराने रचनाकर्मियों को टटोला जाए और पता किया जाए कि उनकी
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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नए वर्ष का मंगल स्वागत

पल पल कर के आखिर फिर से, साल पुराना गुजर गयाएक बार फिर सुबह हुई तो नया नया उत्साह भर गयानया नया सा क्या है इसमे, क्यों अज्ञात ख़ुशी है मन में यहीं सोंच कर खोया हूँ मैं, झांक रहा हूँ मन दर्पण मेंनए साल का पहला दिन भी, बीत चला है न जाने कबनए वर्ष की नयी
 
राकेश
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नव वर्ष की नई सुबह .....

नव वर्ष की नई सुबहऐसी लाए खुशहालीखुशियों ने घर-आंगन महकेरहे न कोई झोली खालीहर इंसान साल भर चहकेहर दिन हो दीपावलीगरीबों को भी रोज खाना मिलेभगवान की रहमत हो ऐसी निरालीहमने तो साल के पहले दिनयही दुआ है दिल से निकालीचलिए नव वर्ष की खुशी मेंपीए अब गरम चाय की
 
राजकुमार ग्वालानी
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नववर्ष मंगलमय हो

एक सुबह तो ऐसी हो जब सूरज सचमुच चमके,धूप सुनहरी रँग दे कण-कण मेरे घर आँगन के...आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.
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सुस्वागतम वर्ष 2010

“नववर्ष के नव प्रभात में याद सभी की आईशब्द शब्द बन हृदय हमारा देता सभी को बधाई।”आप सभी पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें। नये साल का पहला दिन तो मेरेपरिवार के लिये दोहरी खुशी लेकर आता है।क्योंकि 1 जनवरी को मेरी छोटी बेटी नित्याशेफ़ाली का जन्मदिन भी
 
JHAROKHA
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नए साल में हम आपसी मतभेदों को भुलाकर अपनी प्रतिभा को अमूल्य विस्तार दें!!!!!!!!!!!

आज हम वर्तमान के इस माहौल का अवलोकन करें तो पाएंगें कि चाहे घर-परिवार हो, चाहे समाज या फिर ये चिट्ठाजगत, हम लोग अपना कितना बहुमूल्य समय और ऊर्जा व्यर्थ के आपसी विवादों, मतभेदों तथा झगड़ों में यूँ ही व्यर्थ में गवाँते चले जा रहे हैं। आखिर ये झगड़े क्यों? एक
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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नए वर्ष के पहले ये संकल्प कर लें

हालांकि नये वर्ष की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान तो कल के बाद शुरू होना चाहिए, इस कारण आज किसी को शुभकामनाएँ नहीं। हाँ, आप सभी से आग्रह है, निवेदन है नये वर्ष में विमर्श के नाम पर किसी विवाद को जन्म न देने का। अपने दिलों से दूसरों के प्रति नफरत का भाव न
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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अजित वडनेरकर का जन्म दिन और पुरुषोत्तम 'यकीन' की नए साल की बधाई

अजित वडनेरकर !!!  मुबारक हो सालगिरह !!! हिन्दी चिट्ठाजगत या ब्लागदुनिया में हमें रोज शब्दों का सफर कराने वाले, चिट्ठाकारों से ना, ना करते हुए भी बक़लम खुद लिखवा डालने वाले हर दिल अजीज़ चिट्ठाकार अजीत वडनेरकर आज अपना जन्म दिन मना रहे हैं।  उ
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi