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भारतीय नव संवत्सर ,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा -कविता -डा श्याम गुप्त ...

भारतीय नव वर्ष १. देव घनाक्षरी ( ३३ वर्ण , अंत में नगण )पहली जनवरी को मित्र हाथ मिलाके बोले ,वेरी वेरी हेप्पी हो ये न्यू इअर,मित्रवर |हम बोले शीत की इस बेदर्द ऋतु में मित्र ,कैसा नव वर्ष तन काँपे थर थर थर |ठिठुरें खेत बाग़ दिखे कोहरे में कुछ नहीं ,हाथ
 
Dr. shyam gupta
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साल २०१०: भविष्य को लेकर साहित्यकारों की राय

साल २०१० और आने वाले समय की पड़ताल को लेकर साहित्यकारों से हुई बातचीत की लम्बी श्रृंखला ब्लॉग 'कबाड़खाना' में चलाई गयी. अब वह पूरी बातचीत पाठक एक ही जगह इस लिंक पर देख सकते हैं. साहित्यकारों का क्रम पहले हुई बातचीत के आधार पर बनता चला गया. हम कई और
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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वर्ष २०१०: 'शब्दों के गढ़ों और मठों से बाहर आयें साहित्यकार'

आबिद सुरती, प्रोफ़ेसर कमला प्रसाद और निदा फाज़ली की नए साल पर दी गयी राय को लेकर हमें मिली प्रीतेश बारहठ की टिप्पणी उत्साहित करती है. उन्होंने लिखा है- 'मेरा मानना यह है कि प्रतिभाशाली लोग थोड़े में छलकते नहीं हैं, उनकी दृष्टि हमेशा गहरी और व्यापक होती है
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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गत वर्ष की शुभकामनायें ---देखिये कितनी काम आई ---

आज ही के दिन, एक साल पहले , ३ जनवरी २००९ को मैंने पहली पोस्ट लिखी थी। नव वर्ष की शुभकामनायें ---इस एक साल में कितनी कामनाएं पूर्ण हुई, आइये देखते हैं --नव वर्ष के लिए शुभकामनाये कामना करता हूँ कि इस नए साल में सबके जीवन में :हँसी के फुव्वारे हों , खुशी
 
डॉ टी एस दराल
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नए वर्ष की वेला

क्यों अंतर्मन में इक उजास-सा लगता हैक्यों आज भली लगती है हर इक बात हमें ?है और दिनों जैसा ही यह सुन्दर विहानफिर क्यों विशेष लगता है यही प्रभात हमें ?जिस बीते कल की उथल-पुथल से गुज़रे हैंउसके सब सबक हमें रस्ता दिखलायेंगे ।यह बात खास है नये वर्ष की वेला
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नववर्ष में परिवार को सुरक्षित करें और परिवार को तोहफ़ा दें आज ही, जल्दी सोचिये और अमल करें [Secure your family, Think fast ….by Term Insurance]

नववर्ष में परिवार को सुरक्षित करें अगर आप ने अभी तक अपने परिवार को सुरक्षित करने की नहीं सोची है तो अब तत्परता से सोचिये और नये साल का तोहफ़ा दीजिये।परिवार को सुरक्षित कैसे करेंगे इंश्योरेन्स से, जी हाँ आपने बिल्कुल सही पढ़ा है इंश्योरेन्स से। केवल इतना
 
Vivek Rastogi
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स्‍वागत 2010

नया साल आया हैवीरान सुबह के नीले आसमाँ से उभरताठिठरती खमुशी में बर्फ़ीली सीटी बजाता दबे पाऊँ आयाठंडी शामों की खमुशियाँउसके क़दमों की आहट समेटेरास्तों में, साएबानों में सिसक रही हैंनिकल आती है शब् को दरीचों की छिदों से पुरजोश झोंकों की बेतहाशा ठंडक ठन्डे
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नव वर्ष की बहुत शुभकामनायें ...!!

HAPPY NEW YEAR 2010स्वागत है नववर्ष .... नयी दिशा और नयी क्रांति के साथ तुम्हारा अभिनन्दन.....!!हो भारत की शान विश्व में .... मानवता की नयी किरण के साथ तुम्हारा अभिनन्दन.....!!सत्यम शिवम् सुन्दरम रहे सदा.....सबके जीवन में हो खुशियाँ तुम्हारा
 
वाणी गीत
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नव वर्ष पर-विशेष

ले उड़े इस जहाँ से धुआँ और घुटन इक हवा ज़ाफ़रानी नये साल में द्विज जी के इस शे’र के साथ इस साल की अंतिम पोस्ट आपकी नज़्र है। वसीम बरेलवी की एक ग़ज़ल आज पहली बार "आज की ग़ज़ल" पर छाया कर रहा हूँ, ग़ज़ल से पहले दो शे’र वसीम बरेलवी के- न पाने से किसी के है, न
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साल नया अब घर की दीवारों पर टांग दिया है [ग़ज़ल] - सतपाल "ख़्याल

रचनाकार परिचय:-सतपाल ख्याल ग़ज़ल विधा को समर्पित हैं। आप निरंतर पत्र-पत्रिकाओं मे प्रकाशित होते रहते हैं। आप सहित्य शिल्पी पर ग़ज़ल शिल्प और संरचना स्तंभ से भी जुडे हुए हैं तथा ग़ज़ल पर केन्द्रित एक ब्लाग आज की गज़ल का संचालन भी कर रहे हैं। आपका एक ग़ज़ल
 
साहित्य-शिल्पी
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नविन वर्ष तुम्हाला सुख समृद्धि आणि भरभराटिचे जावो..!

मी मराठीच्या सर्व वाचकांना/ कवींना/ लेखकांना थोडक्यात, सर्वांनाचःएक नवीन दिवस ..सुंदर आणि आल्हाद कारी सकाळ घेऊन येईल...मनाच्या अंतरंगामधे नवीन पालवी फुटेल ...प्रत्येक क्षणाकडे पाहून कणाकणाला जाणीव होईल त्या सूर्योदयाची ...ज्याची सगळे आतुरतेने वाट पाहत
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लिखाडी़

नव वर्ष पर सबको हार्दिक शुभकांमनाए! यह वर्ष सबके जीवन में सुख समृद्धि एवं सुयश लेकर आए।
 
अशोक मधुप
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बधाई वाले कृपया दूर रहें

लो नया साल शुरू हो गया। पूरा विश्व खोया है नव वर्ष की उमंगों में। जयपुर में भी धूम-धाम मची है। पर इन सबके बीच मात्र एक शख्स ऐसा भी है, जो अभी भी अपनी टेंशन में घुसा हुआ है। बार-बार जोर-जोर से चिल्ला रहा है- `बधाई वाले कृपया दूर रहें´, `अरे पूरा पेज त
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नव वर्ष

नव सृजन, नव हर्ष की, कामना उत्कर्ष की, सत्य का संकल्प ले प्रात है नव वर्ष की . कल्पना साकर कर, नम्रता आधार कर, भोर नव, नव रश्मियां शक्ति का संचार कर . ज्ञान का सम्मान कर, आचरण निर्माण कर, प्रेम का प्रतिदान दे मनुज का सत्कार कर . त्याग कर संघर्ष का, आ