नरेन्द्र जैन की तीन कविताएँ
(उनके नए संग्रह काला सफ़ेद में प्रविष्ट होता है से साभार) भाई-----दिवंगत बड़े भाई के लिएजहाँ तक छायाचित्र संबंधी समानता का प्रश्न हैबड़े भाई लगभग मुक्तिबोध जैसे दिखलायी देते थेचेहरे पर उभरी हड्डियाँ और तीखी नाकजीवन रहा दोनों का एक जैसा कारुणिकऔर विषमवह
Apr 22 2010 09:34 AM



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