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बालगीत--नन्हीं चुहिया

नन्हीं चुहिया चली अकड़कर, दाना दांत दबाए, है कोई क्या ऐसा, जो मुझसे रेस लगाये। सुनकर चुहिया की बानी, बोली बिल्ली खिसियानी, इक दिन लाऊंगी रस्ते पर, याद आएगी तुझको नानी। बिल्ली बैठी रस्ते पर, इक दिन घात लगाए, दिख जाए जो चुहिया, उसको धर लूं पांव दबाय। घू
 
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