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अब कोई नहीं लौटेगा वहां

कहीं मिलते कभी, कुछ कही, कुछ सुनी होतीकभी दीवानों की कोई याद ही बुनी होतीयूं तो सबने ही चले जाना है इस दुनियां से किसी अजनबी साकिसी के ख्यालों की कोई राह ही चुनी होतीतुम तो बेगाने रहे, बेगाना ही हमको जानाना कभी शिकवा किया, ना कभी मारा तानाख्वामखा ख्यालों
 
Rajey Sha
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ये ख्याल कब तक

इस सफर से,मेरी मर्जी ना पूछ।हवाओं से मजबूर तिनकों की,क्या कोई मर्जी होती है?जो भी अपना है,बस उतना ही अपना है,जितनी की मेरी गलतफहमी।पता नहीं वक्त क्या होता है,मंजिल क्या होती है।ये ख्याल कब तक पलता है,ये जिस्म कहां ढलता है।राजेशा का ब्लॉग - अजनबी
 
Rajey Sha