अक्स
उस रात जब कुछ संजीदा शिकायतें अपने खुश्क लबों पे लिए मेरे कमरे पर तुम आई थी.. और बिस्तर पर चादर की चंद सिलवटों के दरमियाँ बिखरे उन तमाम तनहा लम्हों को बिना पीछे देखे समेट ले गई थी.. तुमको शायद नही पता.. एक चीज़ जो तुम भूल गई थी.. आज भी साहिल करीब जान
Dec 29 2009 11:53 AM



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