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यह मौत है शिरिन-शरमिन की, पर उनका क्या कसूर?

वामपंथी विचारधारा से शुरू हुआ नक्सलवाद अब लगता है, तृणमूल कांग्रेसी विचारों का समर्थक हो गया है। वामपंथी तीस से अधिक वर्षों से बंगाल में काबिज हैं। ममता को राज करने का कोई भी मौका नहीं मिला। अब वह किसी भी कीमत पर यह सत्ता हासिल करना चाहती है।
 
चन्दन कुमार
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सलवा जुडूम जिंदाबाद! बाल्को (कांड) जिंदाबाद!

उन्हें बहुत पीड़ा हो रही है कि एक अदने-से पुलिस अफसर को छुड़ाने के लिए बड़ी मुश्किल से हाथ आये तेईस ‘आतंकवादियों’ को क्यों छोड़ दिया गया? हां, कुछ फैशनपरस्त लोगों की निगाह में अभावों में जीते-मरते और सड़कें खोद कर यह मान लेने के लिए शिक्षित या बाध्य किये
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इस मातम का कोई नाम नहीं

एक गरीब ने दूसरे गरीब की हत्या कर डाली। पहला हिंसक होकर अपने शोषण का बदला लेना चाहता है। पर अब वह अपने पाक मकसद से भटक चुका है। दूसरा उसे मारना नहीं चाहता। पर हुक्म की तामील करना उसका काम है। उसी से उसकी रोजी-रोटी चलती है। नक्सलियों ने जो दंतेवाड़ा में
 
चन्दन कुमार
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श्रद्धांजलि के स्वर में विलाप

कौन चाहता है इन चिरागों को बुझाना?  मुझे भी दुख है उन ग़रीब जवानों की असमय मृत्यु पर…  तब भी होता है जब कहीं दुबकी सी ख़बर  होती है कि आठ नक्सली मारे गये...  तब भी जब दंगे में मारे गयी लाशें अख़बारों में लहू बहाती
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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नक्सलियों का तांडव और सरकारी मुआवजा

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों की कारस्तानी सभी ने देखी। देश के 76 सपूत शहीद हो गए। ऐसी वारदात के बाद इनके परिजनों के लिए सरकार मुआवजे की घोषणा जरूर करती है। एक तरह से मरे हुए लोगों की कीमत तय करती है। यानी मुर्दे की कीमत भी हमारे यहां ही तय होती
 
चन्दन कुमार
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कहां है, डॉ विनायक सेन से लेकर मेधा पाटकर और मानवाधिकार के नाम का रोना रोने वाले/वाली रूदालियां? और कहां है नक्सलवाद की रुमानियत में डूबी अरुंधती रॉय

Sanjeet Tripathi - Buzz - Public - Mutedबस्तर के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल विस्फोट में 75 से ज्यादा जवान शहीद, कई घायल,कई लापता। अब तक की सबसे बड़ी घटना। नमन शहीदों को। लेकिन कहां है, डॉ विनायक सेन से लेकर मेधा पाटकर और
 
Sanjeet Tripathi
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सन्याल के सपनों का मर जाना

नक्सली आंदोलन के जनक का चले जाना सरकार और प्रशासन के लिए जरूर खुशियों की सौगात लेकर आया होगा। लेकिन यह सच है कि सन्याल की मौत यह जता दिया कि किस तरह एक सपने का अंत होता है। उन्होंने भी आखिर में हिंसा का रास्ता छोड़कर माओवादियों की हिंसा की मुखालफत की थी।
 
चन्दन कुमार
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कानू संन्याल और नक्सलवाद

कानू संन्याल ने मंगलवार को आत्म हत्या कर ली। इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है। भारत में नक्सल मूवमेंट की नींव रखने वाला शख्स भला आत्महत्या कर ले, किसी को भला यकीन कैसे हो सकता है। संन्याल एक ऐसे क्रांति के जनक थे, जिसन भारत में कम्यूनिस्ट राजनीति की दशा और
 
चन्दन कुमार
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क्या इंटरनेट परोस रहा है नक्सल विचार धारा ??

गूगल सर्च में यदि आप अंग्रेजी एवं हिन्दी में ‘नक्सल’ शब्द को खोंजें तो लगभग पांच लाख पेज की उपलब्धता नजर आती है. इन पांच लाख पेजों पर सैकडों पेजों के लिखित दस्तावेज, चित्र व फिल्मो के क्लिपिंग्स उपलब्ध हैं जिनमें से कईयों मे, लाल गलियारे को स्थापित करने
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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ऑपरेशन ग्रीन हंट बुरी तरह से असफल साबित होगा

हरिंदर बवेजा पंजाब से उग्रवाद को उखाड़ फेंकने वाले केपीएस गिल से आपरेशन ग्रीन हंट के बारे में जजाने की कोशिश कर रही हैं. केपीएस गिल की सबसे बड़ी पहचान पंजाब में अलगाववादी आन्दोलन के खात्मे से जुड़ी रही है. इसके अलावा उन्हें दोसरे राज्यों में भी सशस्त
 
Reyaz-ul-haque
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नक्सलियों को खोद कर उखाड़ फैंकना चाहिए

हत्याएँ करने वाले इन दरिंदों से हम क्यों सहानुभूति रखें? भारत के नक्सली आतंकवादी हैं। वामपंथ विचारधारा वाले लोगों को सुनकर यह बुरा लग सकता है लेकिन मैं इस बात का पक्षधर हूँ कि इस समस्या को मूल रूप से खत्म कर देना चाहिए क्योंकि इन लोगों ने जिन छोटे कि
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नक्सलवाद

जैसे चम्बल के डकैत वैसे ही नक्सलवादी, हमने तो ज्यादातर डकैतों के बारे में सुना है कि इनपर या इनके परिवार पर दबंगों या अधिकारियों द्वारा मिल कर अत्याचार होने से बदला लेने के लिए सबसे आसान तरीका डकैत बन जाना था। जब डकैतों को राजनीतिक संरक्षण मिलने लगा
 
शंकर फुलारा
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जिम्मेवार कौन?

दूसरे चरण के मतदान के ठीक एक दिन पहले झारखण्ड में माओवादियों ने फिर एक बड़ी घटना को अंजाम दिया. बरवाडीह से मुगलसराए के बीच चलने वाली बीडीएम पैसेंजर गाड़ी को लातेहार के पास चार घंटे तक अपने कब्जे में रखा जिसमे अनुमानतः ७०० यात्री सवार थे. अभी ज्यादा दि
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संसदीय राजनीति में 'बैठा'

लोकतंत्र अन्य सभी शासन प्रणालियों से बेहतर क्यों है? क्या जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा किया गया शासन ही इसकी श्रेष्ठता का उत्कृष्ट उदाहरण है। हर जन के लिए ग्राह्यता और निश्चित अवधि पर जनता के मताधिकारों का प्रयोग इसकी सर्वोच्चता को निश्चित
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ऐसे तो हो चुका नक्सलवाद का इलाज

राज्यपाल द्वारा बुलाई गई बैठक को एक प्रभावशाली नेता ने निरस्त करवा दिया. ऐसे तो होने से रहा कोई काम. छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी नक्सल समाया के बारे में . पहले तो कांग्रेस में ही सर फुट्टवल होने लगी बैठक के बहिस्कार को लेकर और
 
Mahesh Sinha