पसंद करें
0
नापसंद करें

प्राण योग

शरीर में पांच तरह के प्राण है. प्राण, समान, व्यान, उदान और अपान. अगर आप आयुर्वेद और तंत्र विद्या को नहीं जानते तो इस बात को समझने में थोड़ी मुश्किल होगी क्योंकि मेडिकल साइंस तो इसे कोरी बकवास कहकर खारिज कर देगा. लेकिन पंच प्राण का विज्ञान वर्तमान
 
alakh niranjan
पसंद करें
0
नापसंद करें

सोपे ध्यान

ध्यान कसे करावे याबाबत मी थोडेसे लिहीत आहे. ध्यान म्हणजे एकाग्रता, नाकाच्या शेंड्यावर चित्त एकाग्र करुन बसणे असा एक गैरसमज असतो. ध्यान म्हणजे सतत जागेपणा राखणे. आता सतत जागेपणा राखायचा कसा? त्याला सुरुवात आपोआप होते आणि त्यासाठी श्वसनावर आधारीत काही
 
यशवंत कुलकर्णी
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

वि‍चार का अन्‍त - ध्‍यान है

मन और मस्तिष्क की गुणवत्ता, ध्यान में महत्वपूर्ण है। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आपने क्या उपलब्ध किया या उपलब्धि के बारे में आप क्या कह रहे हैं, बल्कि मन का वह गुण है जो निर्दोष और अतिसंवेदनशील है। नकार के द्वारा सकारात्मक अवस्था तक पहुंचा जाता है। हम समूह
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

विचार, स्मृति की तरह हो तो उसे नकारना अत्यावश्यक है।

कोई कैसे नकार सकता है? क्या कोई ज्ञात को नकार सकता है, किसी महान नाटकीय घटना में नहीं बल्कि छोटे-छोटे वाकयों में? क्या मैं शेव करते समय स्विटजरलैंड में बिताये हसीन वक्त की यादों को नकार सकता हूं? क्या कोई खुशनुमा वक्त की यादों को नकार सकता है? क्या कोई
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

पतंजलि योग दर्शन-सवितर्क और निर्वितर्क समाधि (patanjali yog darshan-samadhi)

तत्र शब्दार्थज्ञानविकल्पैः संकीर्णा सवितर्का समापत्ति।।हिन्दी में भावार्थ-यह समाधि की प्रारंभिक अवस्था है जिसमें मनुष्य का ध्यान सासंरिक विषयों से पृथक तो हो जाता है पर शब्द, अर्थ और ज्ञान का आभास कहीं ने कहीं उसके मस्तिष्क में बना रहता है।  इसे
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

भ्रम को भ्रम सा देख लेने पर सब स्‍पष्‍ट हो जाता है

जीवन में प्रतिपल हो रहे परिवर्तनों के, निरन्तर स्पर्श में रहने को देखना* ध्यान है। एक व्यक्ति जो एक पापी से संत होने की विकासयात्रा में है वह एक संभ्रम से अन्य भ्रम में यात्रा कर रहा है। यह सारी गति भ्रम में ही है।  जब मन, यह भ्रम ही देख लेता है...
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

झूठ के सच को देखना

अनुभव की भूख या तृष्णा ही भ्रम का, माया का आरंभ है। जैसा कि अब आप जानते हैं, आपकी दृष्टि- आपकी पृष्ठभूमि या अतीत का प्रेक्षण या अनुमान है, या परिस्थितियों द्वारा संभावनाओं को देखना है, और यह ही वह अनुमान या संभावनाएं हें जो आपने अनुभव किये हैं। निश्चित
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

ध्यान के लघु प्रयोग

विपरीत विचार! यह एक सुंदर व उपयोगी विधि है। उदाहरण के लिए- यदि आप बहुत असंतुष्ट महसूस कर रहे हैं, तो उसके विपरीत संतोष का मनन करें- संतोष क्या है? एक संतुलन लाएं। अगर आपके मन में क्रोध उठ रहा है, तो करुणा को ले आएं, करुणा के बारे में विचार करें। और,
 
राजेंद्र त्‍यागी
पसंद करें
0
नापसंद करें

ध्यान के लघु प्रयोग

वृक्ष से मैत्री! किसी वृक्ष के पास जाओ, वृक्ष से बातें करें, वृक्ष को छूएं, वृक्ष को गले लगाएं, वृक्ष को महसूस करें, वृक्ष के पास बैठें और वृक्ष को भी महसूस होने दें कि आप एक अच्छे आदमी हैं और आपकी आकांक्षा उसे चोट पहुंचाने की नहीं है। धीरे-धीरे मैत्
 
राजेंद्र त्‍यागी
पसंद करें
0
नापसंद करें

ध्यान के लघु प्रयोग

हां' का अनुसरण! एक महीने के लिए सिर्फ 'हां' का अनुसरण करें, हां के मार्ग पर चलें। एक महीने के लिए 'नहीं' के रास्ते पर न जाएं। 'हां' को जितना संभव हो सके सहयोग दें। उससे आप अखंड होंगे। 'नहीं' कभी जोड़ती नहीं है। 'हां' जोड़ती है, क्योंकि 'हां' स्वीकार
 
राजेंद्र त्‍यागी
पसंद करें
0
नापसंद करें

ध्यान के लघु प्रयोग

निष्क्रिय ध्यान! यह ध्यान प्रात:काल के लिए है। इस ध्यान में रीढ़ को सीधा रख कर, आंखें बंद करके, गर्दन को सीधा रखना है। ओंठ बंद हों और जीभ तालु से लगी हो। श्वास धीमी गहरी लेना है। और ध्यान नाभि के पास रखना है। नाभि-केंद्र पर श्वास के कारण जो कंपन मालू
 
राजेंद्र त्‍यागी
पसंद करें
0
नापसंद करें

Meditation and control ध्यान और नियंत्रण

हि‍न्‍दी  :  पारंपरिक शास्त्रीय, सामान्य ध्यान में किसी गुरू द्वारा उपजायी प्रक्रिया और जिसमें नियंत्रक और नियंत्रित से सरोकार होता है। गुरू कहता आपको अपने विचारों पर नियंत्रण करने को कहता है कि जिससे आप विचार को खत्म कर सकें या आखिरकार कोई
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

ध्यान कोई पद्धति नहीं है

ध्यान, सचेतन ध्यान नहीं है। क्या आप इसे समझ रहे हैं? यह किसी पद्धति का अनुसरण करता हुआ, किसी गुरू सामूहिक ध्यान, एकल ध्यान, या जेन या किसी अन्य पद्धति का अनुसरण करता हुआ सचेतन ध्यान नहीं है। यह पद्धति नहीं हो सकता क्योंकि तब आप अभ्यास , अभ्यास... अभ्
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

ध्यान जीवन से अभिन्न है

ध्यान जीवन से अलग नहीं है। ऐसा नहीं करना है कि कमरे के किसी कोने में जाकर बैठ जाना है, 10 मिनट ध्यान लगाना है और उसके बाद वापस अपनी कसाईपने वाले ढर्रे पर लौट आना है। कसाई की... ये उपमा नहीं हकीकत है। ध्यान सर्वाधिक गंभीर चीजों में से एक है। इसे आप सा
टैग: ध्यान
पसंद करें
1
नापसंद करें

ध्‍यान न प्रार्थना, है न समर्पण

प्रार्थना शायद परिणाम देती हो अन्यथा करोड़ों लोग प्रार्थना नहीं करते। और शायद प्रार्थना मन को शांत भी बनाती है, किन्हीं विशेष शब्दों को दोहराते रहने से मन शांत हो जाता है। और इस शांति में कुछ पूर्वाभास, कुछ नजर आना, कुछ जवाब मिलना जैसा भी होता होगा। ल
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

अनवधान के प्रति जागरूक होना

हमारा देखना और सुनना, अवधान... ध्यान का ही एक प्रकार है और ध्यान की कोई सीमा नहीं, कोई प्रतिरोध नहीं इसलिए यह असीम है। ध्यान के लिए अथाह ऊर्जा लगती है जो एक ही बिन्दु पर टिकी न हो। इस अवधान में पुनरावृत्ति करने वाले कोई भी क्षण नहीं, यह यांत्रिक नहीं
टैग: ध्यान
पसंद करें
1
नापसंद करें

एकाग्रता और ध्यान में अन्तर

अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा को किसी विशेष बिन्दु पर फोकस करना एकाग्रता है। ध्यान में कोई बिन्दु विशेष नहीं होता जिस पर फोकस किया जाये। हम एकाग्रता से भलीभांति परिचित हैं पर हमें ध्यान की खबर नहीं। जब हम अपनी देह पर ध्यान देते हैं तब देह पूर्णतः शांत हो जाती
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

आलोचना के बिना, जागरूक भर रहना

ध्यान ऐसी चीज नहीं है कि उसे करने के बारे में सोचा जाये या नियत समय सारणी बनायी जाये या मुहूर्त निकाला जाये। यह तंत्र-मंत्र-यंत्र जैसा नहीं कि जप-तप के लिए फलां-फलां जगह हो, कम्बल या किसी विशेष तरह का आसन हो, दिशा विशेष की ओर मुंह हो, ध्यान के सबंध म
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

जो मन असाधारणरूप से शांत है, स्पष्टदृष्टा है उसे सीखने को शेष है भी क्या?

केवल देखने, सुनने के अतिरिक्त, सीखना क्या है? सीखें पर किसी मनोवैज्ञानिक या विशेषज्ञ के कहे अनुसार नहीं। आप अपने आप को ही लें, अपने आप को ही देखें - बिना किसी आलोचना या प्रशंसा, निर्णय लेने के उद्देश्य से, या तुच्छता से अलग थलग पटक देने जैसे नहीं....
टैग: ध्यान
पसंद करें
0
नापसंद करें

नाभि से अपने आप को कैसे उन्नत करें?

जो लोग साधना मार्ग पर आते हैं उन्हें सिखाया जाता है कि आप स्वांस को नाभि से लेना और छोड़ना प्रारंभ करें. अब बड़ी मुश्किल यह है कि चिकित्सा विज्ञान कहता है कि फेफड़े से सांस लो और छोड़ो. चिकित्सा विज्ञान ही नहीं आसन प्राणायाम में भी फेफड़ों से स्वांस को
 
alakh niranjan