पसंद करें
0
नापसंद करें

उड़ते धुल

उड़ते धुल जिन्दगी का इक फलसफा हैबीते दिन भी भुल जाते है नयी दिन की तरह।गुम हो जाते कई कहानी जिन्दगी के पन्नेजम जाती है धुल उन यादो के पन्नो पर।ये जिन्दगी का फलसफा भी अजीब हैजब करवट लेती है यादो के पन्ने।
 
धीरज शाह
टैग: धुल