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शनैश्चरी अमावस्या

 आज 12-06-2010 ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष,रोहिणी नक्षत्र ,शनैश्चरी अमावस्या है।चंद्र का संचार मिथुन राशि पर है।आज ही शनि जयंती,भावुका अमावस्या और वट सावित्री व्रत भी है । इन सब के साथ-साथ आज सर्वार्थ सिद्ध योग भी है।इस शक्तिशाली योग मे प्रारम्भ किये अभीष्ट
 
anjana
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काशी में एक दिन

---हरिशंकर राढ़ीगेस्ट हाउस में नहा - धोकर लगभग ११ बजे हम काशी विश्वनाथ जी के दर्शन के लिए चल पड़े। काशी में रिक्शे अभी बहुत चलते हैं, भले ही स्वचालित वाहनों की संखया असीमित होती जा रही हो। रिक्शे की सवारी का अपना अलग आनन्द और महत्त्व है। इधर रिक्शा चला और
 
Hari Shanker Rarhi
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फतवा है फरमान नहीं

हाल ही में दारुल उलूम देवबंद से एक फतवा जारी हुआ है, जिसके मुताबिक किसी मुस्लिम महिला का कार्यालयों में पुरुष सहकर्मियों के साथ काम करना और उसकी कमाई से घर का खर्च चलाना गैर इस्लामिक माना गया है। यह पहली बार नहीं हुआ है, भारत के मुस्लिम संस्थान बरसों से
 
प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi
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शब्दलेख सारथी

प्रीति ताहि सो कीजिये, जो आप समाना होयकबहुक जो अवगुन पडै+, गुन ही लहै समोयसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रीति उसी से करना चाहिए, जो अपने समान ही हृदय में प्रेम धारण करने वाले हों। यह प्रेम इस तरह का होना चाहिए कि समय-असमय किसी से भूल हो जाये तो उसे
 
दीपक भारतदीप
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The model of Islamophobia नियमों का नाम ही धर्म है

इनसान ने आज जितनी भी तरक्क़ी की है वह सब नियमों की खोज और उनके पालन के बाद ही संभव हो सका है । नियमों का नाम ही धर्म है । ये वे नियम होते हैं जो व्यक्ति और समाज को जीना और मरना सिखाते हैं । प्राकृतिक नियमों की तरह ये नियम भी शाश्वत होते हैं । देश-काल और
 
DR. ANWER JAMAL
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कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयन्ती पर विशेष- दीन-हीन मनुष्य का सम्मान पद है धर्म -2-

     हिंदी के लेखकों और आलोचकों की मुश्‍कि‍ल यह है कि‍ वे धर्म और साहि‍त्‍य को अलग -अलग खांचों में रखकर देखते हैं। वे धर्म,मनुष्‍य और साहि‍त्‍य के बीच के अन्‍तस्‍संबंध को अभी तक देख ही नहीं पाए हैं। आदि‍कवि‍ से लेकर भक्‍ति‍ आंदोलन के
 
jagadishwar chaturvedi
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कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयन्ती पर विशेष- दीन-हीन मनुष्य का सम्मान पद है धर्म -1-

(महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर)  (हम रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयन्ती को नया जमाना पर पूरे साल मनाएंगे। इस साल हिन्दी के भी कई महान लेखकों के जन्म शताब्दी समारोह पूरे साल चलेंगे। हम लगातार साहित्य की महान विभूतियों को स्मरण करते हुए अपने
 
jagadishwar chaturvedi
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अघोर परम्परा के प्रसिद्ध स्थल

बिंध्याचलबिंध्य की पर्वत श्रृँखला एवं उसमें अवस्थित माँ बिंध्यवासिनी का शक्तिपीठ भारत ही नहीं अपितु समग्र विश्व में प्रसिद्ध है । मिरजापुर इस स्थल का रेलवे स्टेशन है, जहाँ से इसकी दूरी मात्र आठ किलोमीटर है । सड़क मार्ग से यह स्थान बनारस, इलाहाबाद,
 
सुरेश पण्डा
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पुरुषोत्तम मास

पुरुषोत्तम मास जिसे मल मास,लोंद का महीना और अधिक मास के नाम से भी जाना जाता है।अधिक मास 32 महीना 16 दिन और 4 घडी के अन्तर मे आया करता है।जो महीना सूर्य संक्रान्ति से रहित हो उसे मल-मास कहते है।जिस महीने मे अधिक मास आता है,उसमे चार पक्ष होते है।प्रथम और
 
anjana
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विदुर नीति-उपकार करे वही सच्चा बंधु (upkar kare vahi bandhu-hindi sandesh)

सा बन्धुर्योऽनुबंघाति हितऽर्ये वा हितादरः।अनुरक्तं विरक्त वा तन्मिंत्रमुपकारि यत्।।हिन्दी में भावार्थ-वही बंधु है जो हमारे उद्देश्य की पूर्ति में सहायक होने के साथ आदर करने वाला हो। अनुरक्त हो या विरक्त पर उपकार आवश्यक करे वही सच्चा बंधु है।  
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भाग्य और लक्ष्य

अंग्रेज़ी के दो शब्द हैं 'फेट' और 'डेस्टिनी' जिन्हें प्रायः पर्याय के रूप में उपयोग किया जाता है. किन्तु इन दोनों में उतना ही विशाल अंतर है जितना एक साधारण मानव और महामानव में होता है. ये दोनों भी एक जैसे ही दिखते हैं. फेट शब्द लैटिन भाषा के शब्द fatum से
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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जो नास्तिक हैं केवल वही असली धार्मिक हैं...बाकी सब पाखंडी हैं....

जो व्यक्ति सही अर्थों में धार्मिक है, न तो वह हिंदू हो सकता है, न तो मुसलमान हो सकता है , न ईसाई, न बौद्ध, न जैन, न ही किसी प्रचलित धर्म या संप्रदाय का हो सकता है..... कोई जैसे ही किसी धर्म या संप्रदाय से जुड़ता है  , लोग उसे धार्मिक होने नहीं देते
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श्रीगुरुग्रंथ साहिब-चिंता तो अनहोनी घटना की करना चाहिये (shri guru granth sahib-chinta n karen

‘चिंता ता की कीजीअै जो अनहोनी होइ।’इहु मारगु संसार को नानक थिरु नहीं कोइ।।हिन्दी में भावार्थ-चिंता तो उस घटना की करना जो अनहोनी हो। इस संसार में तो सभी कुछ स्वाभाविक रूप घटता रहता है और यहां कुछ भी स्थिर नहीं है। ‘सहस सिआणपा लख होहि त इ न चलै
 
दीपक भारतदीप
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पहला हिन्दू धर्म-दर्शन विश्वकोष

                         चित्र बी बी सी हिंदी से साभारआज जब पूरी दुनिया में धर्मों के प्रति शंकाएं और पूर्वाग्रह बढ़ते ही जा रहे हैं
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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चुप हो जाओ नहीं तो चलती ट्रेन से फेंक दूंगा

 धर्म हमारे यहां एक बेहद संवेदनशील विषय हैं.  धर्म या भगवान के बारे में कुछ भी बोलने से लाखों लोगों की भावनाएं ऐसे भड़कती हैं जैसे अपनी परछाईं को देखकर भेड़ या लाल कपड़े को देखकर सांड़ भड़कता है. मुझे तो लगता है कि इन्सान इस विषय पर ऐसा भड़कता है कि
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धर्म को तो राजनीति से गंदा न करें

अपने देश के नेता जहां जाते हैं, वहां के माहौल को अपनी गंदी राजनीति से गंदा करने से बाज नहीं आते हैं। अब अपने छत्तीसगढ़ राज्य की भाजपा सरकार ने जब हरिद्वार कुंभ में स्नान करने की योजना बनाई तो इसके लिए विपक्षी पार्टी कांग्रेस के विधायकों को भी इस धार्मिक
 
राजकुमार ग्वालानी
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धर्म के बारे में लिखने ..एवं ..टिप्पणी करने बाले.. तोता-रटंत.. के बारे में यह पोस्ट ....

जीसस जन्म से क्रिश्चन नहीं ...यहूदी थे.  ....पैगम्बर मोहम्मद जन्म से मुसलमान नहीं थे....भगवान बुद्ध जन्म से बौद्ध नहीं थे.....भगवान महावीर जन्म से जैन नहीं थे......गुरू नानक जन्म से सिक्ख नहीं थे....हिंदू धर्म में भी बहुत सी धाराएं हैं......कई
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त्राहिमाम !!!!

त्राहिमाम !!!!आजकल ब्लॉग जगत पर धर्म-चर्चा पर महासंग्राम मचा है ,लोग लैपटॉप मोबाइल लेकर जुट गए है ,ऐसी-तैसी करने में और करवाने में, अपन को तो ये एकदम हिट टोपिक लगता है बीड़ू, वो क्या कहते है हिंग लगे ना फिटकरी और रंग चोखा..गूगल उठाओ और ऐसी हज़ारों मेल में
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रामनवमी के पावन अवसर पर एक कविता

सबसे पहले रामनवमी के पावन अवसर पर सभी सुधि पाठको को बहुत बधाई।रामनवमी से दो दिन पहले यानी की परसों ही भगवान् राम को एक बिल्कुल अलग से नज़रिए से समझने का प्रयास मैंने अपने इसी ब्लॉग पर प्रस्तुत किया था. आज इस पवन अवसर पर, डा. हरिओम पंवार द्वारा रचित और
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राम और राम कथा का दर्शन

तुलसी दासजी द्वारा रचित रामचरितमानस केवल एक काव्य ग्रन्थ नही है अपितु ये तो एक कल्पवृक्ष है. बालकाण्ड इस वृक्ष की सबसे गहरी और मजबूत जड़े है. अयोध्याकाण्ड इसका तना है, अरण्यकाण्ड इसकी टहनियां है, किष्किन्धा काण्ड इसके पत्ते है, सुन्दरकाण्ड इसका रस है,
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भला उसका धर्म मेरे धर्म से अच्छा कैसे ?

करीब दो दशक या उससे भी पहले, भारत में टीवी पर एक विज्ञापन आना शुरू हुआ था, "भला उसकी साडी मेरी साडी से सफ़ेद कैसे" ठीक वैसा ही हम आज भी देख रहे है जब लोग अनजाने में ही सही कह रहे है "भला उसका धर्म मेरे धर्म से अच्छा कैसे ?" वो ये सिद्ध करना चाहते है कि
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शास्त्रों में जिस रक्ष संस्कृति का वर्णन है वो क्या है ?

जैसा की मैंने कल के अपने लेख में लिखा था हिन्दू धर्म ग्रन्थ में लिखे हर श्लोक के चार प्रकार के अर्थ (शब्दार्थ, भावार्थ, व्यंगार्थ और गुडार्थ) निकले जा सकते है. संत कवी तुलसीदासजी ने ये पहले ही जान लिया था कि आगे कलयुग में आने वाले समय में आम मनुष्य,
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किसी भी धर्म के बारे में गलत बोलना या लिखना क्या उचित है

ये बात बिलकुल सही है कि समय के साथ साथ हिन्दू धर्म का हास होता गया है और आज समाज में व्याप्त बाबाओ के विभिन्न रूप जैसे की हत्यारा बाबा, बिचौलिया बाबा, सेक्स रैकेट वाला बाबा, स्टिंग बाबा, अय्याश बाबा, गाली बोलता बाबा, बिस्तर में बाबा, ढोंगी बाबा, पाखंडी
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महाकुम्भ पर्व का द्धितीय शाही स्नान

विक्रम संवत् 2066 ,चैत्र मास कृष्ण पक्ष अमावस्या सोमवार दिनांक 15 मार्च 2010 को आज हरिद्धार मे महाकुम्भ पर्व का द्धितीय शाही स्नान है। आज सोमवती अमावस्या भी है ।आज सूर्य और चंद्र का अद्भूत् संयोग है ।सोमवती अमावस्या और महाकुम्भ का यह अद्भूत् संयोग 760
 
anjana
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अखिर ये किसका पैदाईस है।

मैं ब्लागर नही हू ब्लागिग नही करता हू लेकिन बिकाउ मिडीया के समाचार देखने और पढ़ने से ज्यादा अच्छा ब्लागरों के ब्लाग को पढ़ना लेकिन कुछ दिन से देख रहा हू कि ब्लागर जगत में एक भूचाल सा दिख रहा है गालि-गलैज के द्वारा अपने अपने खानदान के व्यक्तित्व का
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हिन्दू धर्म की कुछ प्रचलित विशेषताएं

हिंदुत्व केवल धर्म नही अपितु ये सफल जीवन जीने का तरीका है. हिंदू धर्म में कई विशेषताएँ है. इसको सनातन धर्म भी कहाँ गया है. भागवद गीता के अनुसार सनातन का अर्थ होता है वो जो अग्नि से, पानी से , हवा से, अस्त्र से नष्ट न किया जा सके और वो जो हर जीव और
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भगवान् राम और माँ सीता के विवाह से सम्बंधित कुछ भ्रांतियां

हाल ही में नेट पर देखा की कुछ विशिष्ट जन को भगवान राम और माँ सीता के विवाह के सन्दर्भ में कुछ भ्रान्ति है. कुछ तर्क वाल्मीकि रामायण से लेकर ये निष्कर्ष निकला जा रहा है की विवाह के वक़्त माँ सीता की उम्र महज छ साल की थी, जो कतई सही नहीं है.जैसा की हम सब
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अघोर साधना के मूल तत्वः प्राणायाम

आज के समय में प्राणायाम कोई नया विषय नहीं है । भारत वर्ष में सभी किसी न किसी प्रकार से प्राणायाम से जुड़े हैं , वह चाहे स्वाश्थ्य रक्षा के निमित्त हो या आध्यात्मिक उन्नति के लिये साधना हो । प्राणायाम के विषय में बाजार में अनेक पुस्तकें , अनेक प्रशिक्षक ,
 
सुरेश पण्डा
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जाति, संप्रदाय, भाषा जो सत्ता सिंहासन पर बिठा दे वही सही

सरकार सुन न रही हो और मांग के प्रति सरकार का उपेक्षा का रुख हो तब तो रैली, प्रदर्शन, सभा की जरुरत समझ में भी आती है लेकिन सरकार कार्यवाही कर रही हो तब इन बातों का क्या औचित्य है? राज्य में आदिवासियों की आबादी 32 प्रतिशत है। यह पुराने आंकड़े है। इसी आधार
 
डॉ महेश सिन्हा
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नये कुल ,गोत्र, जाति और संप्रदाय

व्यंगलेखनये कुल ,गोत्र, जाति और संप्रदायविवेक रंजन श्रीवास्तव ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर मो ९४२५८०६२५२ धर्म , कुल , गोत्र, जाति और संप्रदाय की जड़ें हमारी संस्कारों में बहुत गहरी हैं . यूं हम आचरण में धर्म के मूल्यो का पालन करें न
 
Vivek Ranjan Shrivastava
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न जाने कब हूर मिलेगी?

'कहानी'  न जाने कब हूर मिलेगी?  अदालत के जज साहब पूरे सप्ताह अवकाश पर हैं। रीडर साहब की मेज पर पड़ी आज की दैनिक मुकदमा सूची गवाही दे रही है कि जिन मुकदमों में आज पेशी थी, उन में तारीख बदली जा चुकी है। जो मुवक्किल पेशी पर आए थे वे तारीखें
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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विदुर नीति-पवित्र संकल्प वाला ही वीर होता है

अपनीतं सुनीतेन योऽयं प्रत्यानिनीषते।मतिमास्थाय सुदृढां तदकापुरुषव्रतम्।।हिंदी में भावार्थ-जो अन्याय के कारण नष्ट हुए धन को अपनी स्थिर बुद्धि का आश्रय लेकर पवित्र नीति से वापस प्राप्त करने का संकल्प लेता है वह वीरता का आचरण करता है। मार्दव सर्वभूतनामसूया
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भ्रष्टाचार,अव्यवस्था और अधर्म की त्रिवेणी पर हर साल होने वाले नकली कुम्भ को असली साबित करने मे लगी है सरकार!कमाल तो ये है कि इस पाखण्ड का कोई विरोध भ

हर साल कुम्भ! कभी सुना है?नही ना!तो आईये छत्तीसगढ और राजधानी के करीब होने कुम्भ में पवित्र स्नान कर के पुण्य कमाईये।आपको सिर्फ़ पुण्य के बारे मे सोचना है बाकी करोड़ों की हेराफ़ेरी के लिये शासन-प्रशासन का संगठित तंत्र मौज़ूद है यंहा।न कोई धार्मिक महत्व और ना
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अघोरेश्वर भगवान राम जीः आश्रम योजना

आदि आश्रम हरिहरपुरमुगलसराय से पूरब दिशा में जी. टी. रोड पर एक किलोमीटर की दूरी पर अलिनगर नाम का एक शहर है । अलिनगर से एक पक्की सड़क सकलडीहा तक जाती है । सकलडीहा चौमुहानी से उत्तर लगभग एक डेढ़ किलोमीटर पर हरिहरपुर आश्रम अवस्थित है ।सन् १९५३ ई० में बाबा
 
सुरेश पण्डा
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देवदर्शन टैक्स इन इंडिया

-हरिशंकर राढ़ीआज की ताजा खबर यह है कि शिरडी स्थित श्री साईं भगवान के दर्शन के लिए अब शुल्क लगेगा। प्रातःकालीन आरती के लिए 500रु, मध्याह्न की आरती के लिए 300रु और सामान्य दर्शन के लिए 100रु। इसमें कुछ शर्तें भी शामिल हो सकती हैं, टर्म्स एण्ड कंडीशन्स
 
Hari Shanker Rarhi
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लोकधर्म (भाग - ३)

(आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी की कृति "गोस्वामी तुलसीदास" से साभार)----------------------------------------------- भक्ति के तत्व को हृदयंगम करने के लिए उसके विकास पर ध्यान देना आवश्यक है | अपने ज्ञान की परमिति के अनुभव के साथ साथ मनुष्य जाति आदिम काल से ही
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अघोरेश्वर भगवान राम जीः श्री सर्वेश्वरी समूह

बाबा जी क्रींकुण्ड स्थल से निकलने के बाद से ही बनारस में अनेक स्थानों पर घूमते रहते थे । उनकी यात्रा कहीं ठहरती नहीं थी । आज इस जगह तो कल दूसरी जगह । मौज के दिन थे । जिधर मन किया निकल लिये । बन्धन कुछ था नहीं । बन्धन उन्हें स्वीकार भी नहीं था । इसी बीच
 
सुरेश पण्डा
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सीपीएम को बीजेपी बनाना चाहते हैं कारत?

वामपंथियों के बारे में एक वाक्य बहुत मशहूर रहा है कि वे विरोधियों से जितना नहीं लड़ते, उतना आपस में लड़ते हैं। इसी के अनुरूप देश के अंदर भी वामपंथ की अलग-अलग धाराओं का एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलने का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है। जाहिर है कि सीपीएम भी
 
प्रणव प्रियदर्शी
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अब भगवान भरोसे कॉमरेड?

वामपंथियों के बारे में एक वाक्य बड़ा मशहूर रहा है कि वे विरोधियों से जितना नहीं लड़ते उतना आपस में ही लड़ते हैं। इसी के अनुरूप देश के अंदर भी वामपंथ की विभिन्न धाराओं का एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलने का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है।स्वाभाविक रूप से
 
प्रणव प्रियदर्शी
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खंडित आत्मा

पिछले लेख मे मैने आत्मा के दो खंडो के बारे मे चर्चा की थी ।जिसमे एक खंड स्त्री तत्व और दूसरा पुरुष तत्व है।वास्तव मे आत्मा के भी वर्ग है ।उच्च, मध्यम और निम्न । जब कालचक्र मे घूमती हुई एक ही वर्ग की आत्माएँ आपस मे मिलती है,तो उन्हे पूर्ण संतुष्टि मिलती
 
anjana
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