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शरद ऋतु के होते..!!

शरद ऋतु के होते , अपने अलग ही रंग ,मन प्रफुल्लित हो झूमता ,प्रिय प्रियवर के संग । मीठी-मीठी ठंडक, तन को प्यारी लगती है ,जो धूप तडफती थी ,वो भी प्यारी लगती है । भूल गये वो गर्मी के दिन ,जब धरती रही धधकती ,जिन चिड़ियों की जान फंसी थी ,वो भी फिरे फुदकती । हर
 
कमलेश वर्मा