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प्रसन्नता की बात है कि हम ब्लोगर्स को माया नहीं व्यापती!

माया याने कि धन याने कि रुपया!हर किसी को व्यापती है यह, हर कोई दीवाना है इसका और हर कोई भाग रहा है इसके पीछे। सभी को सिर्फ यही चिन्ता खाते रहती है कि चार पैसे कैसे बना लिये जायें? कोई कुछ कार्य करता है तो उस कार्य के बदले में सिर्फ धन की ही अभिलाषा रखता
 
जी.के. अवधिया
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इसीलिए सिर्फ प्रेम करना चाहिए..: महफूज़

अन्नपूर्णा कूड़ा फेंकने घर के बाहर आई तो देखा कि तीन बूढ़े व्यक्ति घर के बाहर वाले चबूतरे पर बैठे हैं. अन्नपूर्णा ने उन्हें नहीं पहचानते हुए कहा " वैसे तो मैं आप लोगों को नहीं जानतीं, फिर भी घर के अन्दर आईये और कुछ भोजन ग्रहण कीजिये.""क्या घर का मालिक घर
 
महफूज़ अली
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भिखारी कौन?

   वैशेषिक दर्शन के सूत्रधार ऋषि कणाद जंगल में एक छोटी सी कुटिया बनाकर रहा करते थे। वह या तो कंद-मूल खाते या फिर अन्न के कण चुनकर लाते और उससे ही अपनी क्षुधा शांत करते। अन्नकणों से जीवन निर्वाह करने के कारण ही उनका नाम कणाद पडा। एक बार की बात
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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लाओ-त्ज़ु का न्याय

अपनी बुद्धिमत्ता के कारण लाओ-त्ज़ु बहुत प्रसिद्द हो गया था और निस्संदेह वह सबसे बुद्धिमान व्यक्ति था. चीन के राजा ने लाओ-त्ज़ु से अपने न्यायालय का प्रधान न्यायाधीश बनने का अनुरोध किया और कहा – “सम्पूर्ण विश्व में आप जितना बुद्धिमान और न्याय