प्रसन्नता की बात है कि हम ब्लोगर्स को माया नहीं व्यापती!
माया याने कि धन याने कि रुपया!हर किसी को व्यापती है यह, हर कोई दीवाना है इसका और हर कोई भाग रहा है इसके पीछे। सभी को सिर्फ यही चिन्ता खाते रहती है कि चार पैसे कैसे बना लिये जायें? कोई कुछ कार्य करता है तो उस कार्य के बदले में सिर्फ धन की ही अभिलाषा रखता
May 10 2010 10:39 AM



Shuffle








