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कबीर के पद

कबीर माला मनहि कि , और संसारी भीख माला फेरे हरी मिले,गले रहट के देख II1IIकबीर जी कहते है कि मन का  माला ही सच्चा होता है बाक़ी तो दिखावा है यदि माला फेरने से ही भगवान् मिलता है तो रहट के गले को देख कितनी बार वो माला फिरती रहती है . अर्थात मन से
 
ana
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दोहे और उक्तियाँ !!

माला फेरत जुग गया फिरा ना मन का फेर कर का मनका छोड़ दे मन का मन का फेर
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दोहे और उक्तियाँ !!

जे गरीब सों हित करै, धनि रहीम वे लोग। कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग ॥- रहीम- 
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दोहे और उक्तियाँ !!

बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर॥- कबीर -
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दोहे और उक्तियाँ !!

तुलसी या संसार में, तीन वस्तु हैं सार। इक सत्संग अरु हरिभजन, निस दिन पर उपकार।।
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दोहे और उक्तियाँ !!

तुलसी मीठे वचन ते, सुख उपजत चहुं ओर। वशीकरन यह मन्त्र है, तज दे वचन कठोर॥
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दोहे और उक्तियाँ !!

राजा, रानी, रंक सब, बड़ा जो सुमरे नाम।कह कबीर बंदा बड़ा, जो सुमरे निष्काम॥ (कबीर) ~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

जो तोको काँटा बुवै ताहि बोव तू फूल।तोहि फूल को फूल है वाको है तिरसुल॥
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दोहे और उक्तियाँ !!

तिनका कबहुँ ना निंदये, जो पाँव तले होय । कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीर घानेरी होय ॥
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दोहे और उक्तियाँ !!

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥
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दोहे और उक्तियाँ !!

कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और ।हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर । ।- कबीर- 
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दोहे और उक्तियाँ !!

बाणी से पहचानिये साहू चोर की जात। अन्दर की करनी सबै निकले मुंह की बात॥(कबीर~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

आवत गाली एक है उलटे होत अनेक। कहे कबीर नहीं उलटिये वही एक ही एक॥ (कबीर)~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

भार झोंक के भाड़ में, रहीम उतरै पार। पे डूबे मंझधार में, जिनके सिर भार॥ (रहीम) ~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

तुलसी इस संसार में. भांति भांति के लोग।सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग॥ (गोस्वामी तुलसीदास)~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

देव सेव फल देत है, जाको जैसे भाय। जैसो मुख पर आरसी, देखो सोई दिखाय॥(वृंद कवि)~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

देनदार कोई और है, भेजत है दिन रैन।लोग भरम हम पर धरै, यातें नीचे नैन॥(रहीम) ~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

पुन्य प्रीति पति प्रस्मतिउ। परमारथ पथ पांच। लहहि सुजन परिहरहि खल, सुनहु सिखावन सांच।।(गोस्वामी तुलसीदास)~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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तुलसी जी के दोहे....................

एक और प्रयास.........................आज सुनिए नीति के दोहे ------(... सिर्फ़ दो दोहे ---- ताकि थोडा समय मिले इसे अपने जीवन में उतारने के लिए ....) Get this widget | Track details | eSnips Social DNA
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दोहे और उक्तियाँ !

मोर तोर की जीवरी बंट बांधा संसार। कबीरा क्यों दास बंधे जाके नाम आधार।।(कबीर) ~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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दोहे और उक्तियाँ !!

कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर। समय पाय तरुवर फरै, केतिक सींचौ नीर।। ~~~~~
 
रजनीश के झा (Rajneesh K Jha)
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इनमें क्या है जो धड़कन में लिए फिरता हूँ

कबीर के पाँच दोहे जिन्हें गाता जा रहा हूँकभी-कभी ऐसा होता है कि आप के मन पर कुछ बातें छा जाती हैं। मेरे मन पर कबीर साहब के कुछ दोहे छाए हुए हैंमैं मन ही मन इन दोहों में भटकता रहता हूँ। मेरी आदत है मुझे शब्दों का सहारा चाहिए। मैं कभी अंदर से खाली रह नहीं
 
बोधिसत्व
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कबीर के दोहे

माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय ।एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर ॥
 
ana
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होली पर दोहे

होली पर दोहे गुल तितली से यों कहे, कैसे खेलूँ फाग भ्रमरों ने की ज्यादती, लूटा सभी पराग हीरा पन्ना दिल हुआ , तन जैसे पुखराज नैना नीलम दे रह, नवरतनी अंदाज देख रूप उनका हुआ, मैं होली पर दंग  चेतन से मैं जड़ हुआ, माँ में बजी मृदंग तट ने
 
किशोर पारीक 'किशोर'
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दोहे

आज दोहों पर भी हाथ आज़माया है- हरियाली व्यवहार में, मन में खिसके रेतझुकने में अव्वल मगर, फूलें-फलें न बेंतकटता शीशम देखकर, गुमसुम बूढ़ा नीमधागा   चिटका   प्रेम   का,  रोया बैठ रहीम मन का मोल चुका रही,
 
हिमान्शु मोहन
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महावीर वचनामृत -12

बहुत दिनों के फिर हाज़िर हूँ. महावीर वचनामृत के साथ. कही लोग बोर तो नहीं हो रहे...? लेकिन ऐसा लगता नहीं. सुधी लेखक-पाठक टिप्पणियाँ कर रहे है.बहुत जल्द कुछ् और नयी रचनाएँ पेश करूंगा. (109)धर्म-प्राण जन से रखें, जीवन में अनुराग।प्रियभाषी सम्यक वही, भव्य परम
 
गिरीश पंकज
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महावीर वचनामृत-11

होली तो हो ली. कब तक उसके रंग में रहे. यह संभव भी नहीं. जीवन को दिशा देने वाले पडावों से गुजर कर ही हम नेकराह पर चल सकते है. गंतव्य भी यह है. नेकराह पर चलना, नेक मनुष्य बने रहना. तमाम तरह की मुसीबतों के बावजूद. महावीर भगवान् के सन्देश यही बताते है. ज्ञान
 
गिरीश पंकज
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चन्द्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस से भगतसिंह के शहादत दिवस तक 'क्रान्तिकारी जागृति अभियान'

नौजवान भारत सभा, बिगुल मज़दूर दस्ता, स्त्री मज़दूर संगठन और जागरूक नागरिक मंच क्रान्तिकारी शहीदों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कल से एक माह का क्रान्तिकारी जागृति अभियान चलाएंगे। चन्द्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस 27 फरवरी से भगतसिंह के शहादत दिवस 23
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पिचकारी के तीर------[दोहे]------ डाo श्याम गुप्त

लकुटि लिये सखियाँ खडीं, बदला आज चुकायं .|सुधि बुधि भूलें श्याम जब सम्मुख आ मुसुकायं | १आज न मुरलीधर बचें, राधा मन मुसुकायं|दौड़ी सुध बुध भूलि कर , मुरली दई बजाय ||२ भ्रकुटि तानि बरजे सुमुखि, मन ही मन ललचाय |पिचकारी ते श्याम की,तन मन सब रंगि जाय ||३रंग
 
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महावीर वचनामृत-१०

(87)केवल मैं ही श्रेष्ठ हूँ, मेरे उच्च विचार।यह बोध सम्यक नहीं, मिथ्या यह आचार।।(88)जन्म, बुढ़ापा, रोग अरु, मरन दुःखों की खान।दुःख ही दुःख चारों तरफ, केवल ज्ञान निदान।।(89)संगति सही न मिल सकी, भटका मैं चिरकाल।मूढ़मति बन कर रहा, जग-जंगल विकराल।।(90)शत्रु से
 
गिरीश पंकज
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दस फागुनी दोहे

होली पास आ रही है. बहुतो पर तो रंग अभी से ही चढ़ रहा है. पता नहीं, होली के दिन उनकी गत क्या होगी..? होली एक नशे की तरह आती है और लोग शरीर और मन दोनों के कपडे उतारने में लग जाते है. गालिया देना, कीचड उछालना, किसी की निंदा करना...बस यही रह गया है होली का
 
गिरीश पंकज
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महावीर वचनामृत-९

बहुत दिनों के बाद फिर हाज़िर हूँ. आपका स्वागत है.... कुछ् तकनीकी दिक्कतों के कारण मेरे प्रियजन अपनी टिप्पणियाँ नहीं दे पा रहे थे. उम्मीद है, अब समस्या का समाधान हो गया हो.(77)नर-नारी में भेद क्या, सब हैं जीव समान।साथ-साथ चलते रहें, होगा नव
 
गिरीश पंकज
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दोहे----------------[कवि कुलवंत सिंह]

मधुर प्रीत मन में बसा, जग से कर ले प्यार .जीवन होता सफल है, जग बन जाये यार .मधुर मधुर मदमानिनी, मान मुनव्वल मीत .मंद मंद मोहक महक, मन मोहे मनमीत .आज गुनगुना के गीत, छेड़ो दिल के तार .दिल में घर बसा लो तुम, मुझे बना लो यार .नन्हा मुझे न जानिये, आज भले हूं
 
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महावीर वचनामृत-८

(66)यह तन इक नौका लघु, नाविक इसका जीव।पार करे जीवन-जलधि, खारा पानी पीव।।(67)वीर मरे, कायर मरे, अंत सभी का होय।लेकिन जो हँसकर मरे, वीर जानिए सोय।।(68)ध्यान करे जो ध्यान से, चित्त होय अनुकूल।जन्म-मरण के  बंध को, प्राणी जाए भूल।।(69)चले आत्मा मोक्ष-पथ,
 
गिरीश पंकज
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दोहे

गीत गुनगुना के आज, छेड़ो दिल के तार .दिल में घर बसा लो तुम, मुझे बना लो यार .मधुर मधुर मदमानिनी, मान मुनव्वल मीत .मंद मंद मोहक महक, मन मोहे मन मीत .मधुर प्रीत मन में बसा, जग से कर ले प्यार .जीवन होता सफल है, जग बन जाये यार .नन्हा मुझे न जानिये, आज भले
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"समझो तभी बसन्त!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“कुछ दोहे”जैसे-जैसे आ रहा, प्रेम-दिवस नज़दीक। गोवा और मुम्बई के, लगे चहकने बीच।।तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग। दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।। प्रेम दिवस में हो रहा, खेल बहुत संगीन। शब्द-ज़ाल में फँस गई, नाजुक उम्र हसीन।। नादानी और भूल से, कभी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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महावीर वचनामृत-७

(56)धर्म, दया से शून्य जो, झगड़ालू औ दुष्ट।मंदबुद्धि वह जानिए, कभी न हो संतुष्ट।।(57)जो मन से है शुद्ध वह, जीते यह संसार।पवन सहारे नाव ज्यों, लग जाती है पार।।(58)कर्म अकेला भोगता, अंत काल इनसान।कौन यहाँ अपना अरे, जो समझे नादान।।(59)माँस-अस्थि, मल-मूत्र
 
गिरीश पंकज
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दस वासंती दोहे

(१) अधरों पर मुस्कान लख,  हुआ दुखों का अंत,लगा पास फिर आ गया, भटका हुआ वसंत. (२)मन में थी दुःख की लहर,मौसम दिखा उदास,खुशियाँ जन्मी तो दिखा, चौतरफा मधुमास.(३)तुमने जब-जब भी छुआ,भागा हर संताप,मौसम भी हँसता प्रिये,दूर खडा चुपचाप.(४)रंग
 
गिरीश पंकज
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महावीर वचनामृत-६

(46)हो जैसा अभ्यास तो, वैसा बनता भाव।नेक जनों का संग हो,तो कैसा पछताव।।(47)जिसे मृत्यु का भय नहीं, वह दुर्लभ इनसान।भोगी ही भयगस्त है, करते संत बखान।।(48) ज्ञान-शरण जो भी गया, उसका बढ़ा विवेक।नैतिक, तप, संयम सभी, पा लाखों में एक।।(49)मेरा मत केवल सही,
 
गिरीश पंकज
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महांवीर वचनामृत-५

(३६)दान-धर्म, पूजा अगर, स्वारथ में जो होय।उसे पुण्य न मिल सके, उल्टे वैभव खोय।।(37)बिन चरित्र जो ज्ञान है, तप जो संयमहीन।व्यर्थ इसे बस जानिए, मनुज बड़ा वह दीन।।(38)जीवन में जो पा गया, इक दिन सम्यक-ज्ञान।मोक्ष उसे ही मिल सका, कहते साधु-सुजान।।(39)मौन रहे
 
गिरीश पंकज
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