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सिर्फ दो लाइन

सिर्फ दो लाइन आप भी मूड में आ लिए अपना भी धीरे - धीरे बन रहा है पेश करता हूँ कि चौराहे की मिटटी को भई  जम कर लज्जा आती है दर्ज़न भर बेटों की अम्मां भीख मांगने आती है -- योगेन्द्र मौदगिल  
 
योगेन्द्र मौदगिल