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बेटी उदास है और माँ के हाथ कठोर

दो कविताएँदिनों देश के दो बड़े दैनिक अखबारों में मेरी दो कविताएँ छपीं। एक कविता विष्णु नागर जी ने नई दुनिया में और दूसरी गीत चतुर्वेदी ने दैनिक भास्कर में छापी। इन कविताओं पर कई मित्रों और कुछ नए पाठकों के मेल आए। लोग बताते हैं कि इन अखबारों के करोड़ों
 
बोधिसत्व
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जोखिम भरा स्‍वांत:सुखाय

मैं पिछले 15 साल से देश के प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भास्‍कर के सागर संस्‍करण में फोटो जर्नलिस्‍ट के रूप में जुड़ा हूं। बहुत छोटी उम्र से फोटो पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूं।इस दौरान मुझे कई खट़टे-मीठे अनुभव मिले। इन अनुभवों ने मेरी दिशा बदल दी। बहुत सी आदतें
 
Riku Sirvya
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दैनिक भास्‍कर में आज हिंदी ब्‍लॉग्‍स पर पूरा पेज

इंटरनैट पर हिंदी को भले ही आज प्रथम दस भाषाओं में शुमार नहीं किया जा रहा हो लेकिन सच यह है कि इंटरनैट पर हिंदी के चिट्ठों की दुनिया का दिन दूनी रात चौगुनी गति से विस्‍तार हो रहा है. इसलिए हिंदी चिट्ठों की बात हर ओर होने लगी है. भारत के प्रमुख हिंदी द
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भास्कर के विमशॅ में ब्लॉग-बतंगड़

दैनिक भास्कर जयपुर ने सोमवार १८ फरवरी से साहित्य पर एक विशेष पेज का प्रकाशन शुरू किया है। इसमें ब्लॉग बतंगड़ नाम का एक कॉलम भी शायद छपा है जिसका शीरषक है-चाहूं भी तो खोल नहीं सकती उस घर के दरवाजे--। इस लेख में रवि रतलामी के ब्लॉग पर रचना श्रीवास्तव क
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गैस ट्रेजिडी पर भास्कर की अदभुत श्रधान्जली

भोपाल। दुनिया में कई काम अदभुत होते हैं कुछ नेक नियत के साथ तो कुछ ग़लत नियत के साथ। लेकिन दैनिक भास्कर ने गैस ट्रे जिडी पर जिस तरह से श्रधांजलि दी वह अदभुत है, न केवल मानवीयता के लिहाज से बल्कि पत्रकारिता में भी एक मिसाल है। शायद इसी लिए भास्कर सबसे
 
भीमसिंह मीणा
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गुजरात में 221 करोड़ की भास्कर प्रिंट प्लेनेट शुरू

भोपाल। भास्कर समूह ने अपने बड़ते ग्रुप में एक और उपलब्धि जोड़ ली है। समूह ने गुजरात में एक अत्याधुनिक प्लांट डाला है। ये ख़बर इसलिए यहाँ दे रहे हनी की एक अख़बार की तरक्की होती है तो मीडिया कर्मियों को भी इसका लाभ मिलता है। भास्कर समूह के अत्याधुनिक ‘
 
भीमसिंह मीणा
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दैनिक भास्कर का प्रकाशन पूर्णत: कम्प्यूटराइज्ड जर्मन केबीए मशीन

हिंदी भाषा के इतिहास में रविवार को एक और गौरव जुड़ गया, जब जयपुर में दैनिक भास्कर का प्रकाशन पूर्णत: कम्प्यूटराइज्ड जर्मन केबीए मशीन पर शुरू हुआ। अभी तक केवल अंग्रेजी अखबार ही इस मशीन का उपयोग करते थे। हिंदी/भाषायी अखबारों के लिए यह गर्व की बात है कि
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बिहार को मुहावरा मत बनाइए खांडेकर साहब

अभिलाष खांडेकर(एमपी स्टेट हेड,दैनिक भास्कर) जब भोपाल को बिहार होने से बचाइए जैसी लाइन लिख रहे होंगे तो यही समझ रहे होंगे कि वो पत्रकारिता की दुनिया में एक नया मुहावरा, एक नया मेटाफर गढ़ने जा रहे हैं। उन्हें अपराध औऱ व्यवस्था के लिजलिजेपन की अभिव्यक्त
 
विनीत कुमार