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देह की बात
देह की बात हो तो कहे भी कोईमन की तकलीफ का ज़िक्र क्या कीजिये सांस एक डोर है फड़फड़ाती हुई जोर से खींचिए फिर उड़ा दीजिए.फागुनी गंध-सा टीसता है ये मनइन कुंवारी हवाओं का स्पर्श कर स्नेह की आखिरी बूँद तक किस
Mar 21 2010 08:13 PM



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