पसंद करें
0
नापसंद करें

राष्ट्र और समाज को समर्पित मेरी एक कविता

इस बार मैं मेरे ईश्वर प्रेमी साधको से माफ़ी चाहूँगा क्योंकि ये कविता भक्ति या प्रेम के ऊपर नहीं हैं । कुछ आदतवश भाव आ सकता हैं पर मैंने उस भाव को रोकने कि बड़ी कोशिश कि हैं । देश ओर समाज में जो आजकल हो रहा हैं । उससे कुछ बाते अच्छी हैं कुछ हौसला तोड़ देने
 
Virender Rawal