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गांधी के आदर्श

भरे मंच से एक फिर गांधी के आदर्शों से खिलबाड किया गया है लेकिन इस बार किसी बाहर से नहीं देश की मामूली चीजों को देवता बनाने वाली प्रसिद्दी के लोभ में फसी लेखिका ने .अरूधती राय ने एक फिर बापू के अंहिसा के रास्तों को झूठा साबित करने की कोशिश की है मैं आपसे
 
acharyakeshav
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कहाँ है वो वैदिक ग्रन्थों में वर्णित "सोम" ???

वैज्ञानिक निरन्तर इस खोज में रहे हैं कि वो सोमरस की जडी बूटी कहाँ मिले, जिसकी वेदों नें बडी भारी प्रशंसा की है.वेद तो उसकी स्तुति से भरे पडे हैं.उसको देवता तक कहा गया है---सोम देवता.वहीं दूसरी ओर इसे कामवर्षक, रोगहर्ता, आनन्द प्रदायक एक मादक पेय भी बताया
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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ईश्वर एक बड़ी सुविधा है – हरीशचन्द्र पाण्डे की कविताएं

अभी ‘इतिहास बोध’ में हरिशचन्द्र पाण्ड़े की कविताओं से गुजरना हुआ। छोटे कलेवर की तीन बेहतरीन कविताओं को यहां साभार प्रस्तुत कर रहा हूं। शायद पसंद आएं। ईश्वर एक बड़ी सुविधा है देवता पहला पत्थर आदमी की उदरपूर्ति में उठा दूसरा पत्थर आदमी द्वारा आदमी के लिए उठा
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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बौद्धिक शोध-हिन्दी व्यंग्य चिंतन (Intellectual research - Hindi satirical article)

अगर आप लेखक या चित्रकार हैं और केवल अभिव्यक्ति के लिय ही रचनाकर्म करते हुए उससे आय की आशा नहीं करते तो फिर अपने पुजने का अहंकार भी छोड़ देना चाहिये। पता नहीं भारतीय समाज की यह पुरानी आदत है या फिर अंग्रेज इसे छोड़ गये कि यहां लेखक या चित्रकार की कामयाबी का
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मनुस्मृतिः दंड के ही भय के लोग कर्तव्योन्मुख होते हैं

सर्वो दण्डजितो लोके दुर्लभो हि शुचिर्नरः। दण्डस्य हि भयात्सर्व जगद् भोगाय कल्पते।। हिंदी में भावार्थ- इस विश्व में राज्य दंड के भय से ही लोग नियम तथा कानून मानते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत कम हैं जो जो स्वभाव से ही पतित्र हों वरना अधिकतर लोग तो दण्ड के भय
 
दीपक भारतदीप