मेरी पसंद....
वो आदमी नहीं मुकम्मल बयान है, माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है. वे कर रहे थे इश्क पे संजीदा गुफ़्तगु, मैं क्या बताऊँ, मेरा कहीं और ध्यान है. सामान कुछ नहीं है फटेहाल है मगर, झोले में उसके पास कोई संविधान है. उस सिरफिरे को यों नहीं बहला सकेंगे आप, वो
Jan 14 2010 06:05 PM



Shuffle








