पसंद करें
0
नापसंद करें

बातों का बतरस

बातें बहुत हैं। हर तरह की हैं। जितने लोग उतनी बातें। हमारे मध्य बातों का एक साम्राज्य-सा विकसित होता जा रहा है। लोगों को बस बातें चाहिए। कैसी भी। कहीं की भी। कहीं से भी। किसी से भी। बातों से हम बातचीत करना सीखते हैं। बातें संवाद का जरिया भी हैं। बातचीत
 
अंशुमाली रस्तोगी
पसंद करें
0
नापसंद करें