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सपने

दुनिया¡ में हर ईन्सान के कुछ सपने होते है।इस प्यार भरी दुनिया¡ में कुछ अपने होते है।मगर फिर भी एसा लगता है।जैसे हर महफिल में हम तन्हा होते है।सपने सजोना हर र्इसांन को अच्छा लगता है,सपनों को सच करना बड़ा प्यारा लगता है।इन्ही सपनों में कई फूल खिलते है,जुदा
 
acharyakeshav
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नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुठी में क्या है?

कुछ दशक पूर्व एक गीत बहुत ही हिट हुआ था.बच्चे मन के सच्चे..सारे जग की आँख के तारे, ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान को लगते प्यारे...इस तरह के और भी बहुत से गीत लोकप्रिय हुए क्यूंकि बच्चे तो बच्चे हैं जिन्हें भगवान का रूप माना जाता है.
 
Rector Kathuria
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अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम गेटस

बाकू  आज़र्बयिजान में 7 जून 2010 को सेनायों के दस्तों का मुआयना करते हुए अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम गेटस और आज़रबाईजान के रक्षा मन्त्री Col. Gen. Safar Abiyev. अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए इन पलों को कैमरे में कैद किया Master
 
Rector Kathuria
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अमेरिकी कम्युनिस्ट पार्टी ने की क्यूबा यात्रा पर लगा प्रतिबन्ध हटाने की मांग

आप देख रहे हैं इन बच्चों को....ये कितने खुश नज़र आ रहे हैं. इनकी ख़ुशी और भी बढ़ सकती है अगर अमेरिकी सरकार क्यूबा यात्रा पर लगा प्रतिबन्ध हटा ले. इस प्रतिबन्ध को हटाने की ज़ोरदार मांग एक बार फिर की है अमेरिकी कम्युनिस्ट पार्टी ने. पार्टी ने इस प्रतिबन्ध
 
Rector Kathuria
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मीडिया के सवालों का जवाब

हाल ही में जब चार जून 2010 को इन्सीच्यूट फार स्ट्रेजिक स्टडीज़ एशिया स्किओरिटी का ९ वां अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन हुआ तो उसमें भाग लेने के लिए अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम गेटस भी विशेष तौर पर पहुंचे. इस अवसर पर उन्होंने पत्रकारों से
 
Rector Kathuria
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अमेरिकन कम्यूनिस्ट पार्टी का 29 वां सम्मेलन सम्पन्न

अमेरिकन कम्यूनिस्ट पार्टी का 29 वां राष्ट्रीय सम्मेलन अपने पारम्परिक जोशो खरोश और उत्साह के साथ समाप्त हो गया. 90 वर्षों के लम्बे संघर्ष से भविष्य के लिए एक नयी ऊर्जा लेते हुए इस बात का संकल्प एक बार फिर दोहराया गया कि कम्यूनिस्ट पार्टी और यंग
 
Rector Kathuria
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पेंटागन में मीटिंग

जापान के रक्षा मन्त्री Toshimi Kitazawa  जब अमेरिका आये तो अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम गेटस ने उनका स्वागत बहुत ही गर्म जोशी से किया. उनके स्वागत में एक विशेष बैठक पेंटागन में भी रखी गयी. 25 माय 2010 को हुई इस विशेष बैठक के इन
 
Rector Kathuria
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विशेष वार्ता भोज

यह छोटा सा आयोजन न तो अलकायदा का है और न ही माओवादियों का. जंगल में यह भोज चल रहा है अफगानिस्तान के एक इलाके लोगर में. दो पश्तो शब्दों "लोय" और "घर" को मिलाकर बना यह नाम लोगर बहुत ही अर्थपूर्ण है. लोय का अर्थ बताया गया है
 
Rector Kathuria
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कौन करना चाहता है हेमलाल का अपहरण!!

बीडीओ साहब का अपहरण हो गया। इससे पहले क्रशर मालिक का हुआ था। अखबार में ऐसी खबरें पढ़कर हेमलाल बडा परेशान है। वह अपना रिक्शा छुपाकर रखता है। उसे डर है कि कहीं उसका अपहरण हो गया और बदले में किसी ने रिक्शा मांग लिया तो वह कमाएगा कैसे और खाएगा क्या! बडी भारी
 
सचिन ..........
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मध्यवर्गीय अच्छापन और लूट का एक किस्सा

कुछ लोग बहुत अच्छे होते हैं। सारा जीवन अपनी धुन में गुजार देते हैं। न किसी को परेशान करते हैं, बडे ईमानदार। मजाल है किसी की पाई भी हाथ में रख लें। जहां कोई भिखारी देखेंगे जेब तक हाथ पहुंच जाएगा और सिक्का भिखारी की झोली में डालकर इस संतुष्टि से उनका चेहरा
 
सचिन ..........
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तीस मिनट का वजन कितना होता है...

यह जानकारी क्या रूह को कंपा देने के लिए काफी नहीं है कि देश में औसतन हर तीस मिनट पर एक किसान आत्महत्या कर रहा है। तीस मिनट कितना समय होता है लगभग उतना जितना मैं शायद अक्सर अपने दोस्त से मोबाइल पर बात करने में बिता देता हूं या फिर आफिस की कैंटीन में चाय
 
संदीप पाण्डेय
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बच्चे और फूल – कविता

बच्चे और फूल ( a poem by ravi kumar, rawatbhata ) बच्चे और फूल – पूर्वार्ध बच्चों को फूल बहुत पसंद हैं वे उन्हें छू लेना चाहते हैं वे उनकी ख़ुशबू के आसपास तैरना चाहते हैं उन्हें तितलियां भी बहुत पसंद हैं बच्चों को उनके नाम-वाम में कोई ख़ास दिलचस्पी
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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चीन के सामने चींटी है भारत

कभी नहीं सोचा था कि दिल्ली के बीचों-बीच स्थित भारत का शो-पीस एग्जेबिशन सेंटर प्रगति मैदान चीन को लेकर हमें इतना कड़ा संदेश देगा। कुछ साल पहले तक यह भारत की उपलब्धियों को बाहरी दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का काम करता था। यहां की इमारतें, पविलियन सब
 
राजेश कालरा
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दो संसार

ये कविता मिथिलेश ने लिखी है मेरे साथ इंदौर भास्कर में सेवारत हैं. मिथिलेश खेल डेस्क पर हैंजहाँ मैं रहता हूँवहीँ पास में एक नाला बहता हैनाले के पार एक अलग है दुनिया बसती हैइस पार से एकदम जुदाइस पार घर नहीं हैंबंगले हैंबड़ी कारें हैंलान हैंरोज धुलने वाली
 
संदीप पाण्डेय
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अँधा कौन ? --- (प्रतीक माहेश्वरी)

बचपन उस अंधे को देखकर यौवन हो गया था...जब अंकुर अपनी माँ के साथ मंदिर से बाहर आता तो उसे देख कर विस्मित हो जाता.. उसे दुःख होता...एक दिन वह अपने दुःख का निवारण करने उस अंधे के पास पहुंचा..पहुंचा और बोला - "बाबा, अँधा होने का आपको कोई गम है?"अँधा बोला -
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नही लिखना चाहती कलम ...???

नही लिखना चाहती कलम ,उस फसाने को , जो नागवार गुजरा जमाने को । फकत हमने तो बस कि थी इल्तिजा , न पता था लग जायेंगी ,सदियाँ उसे मनाने को । कितनी मुश्किलें आयें इस राहेबर में , इंतजार कर लेंगे ता -उम्र उसे पाने को । चाहे सूली पर चढ़ा दे जमाना , न बे राह
 
कमलेश वर्मा
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इस मजेदार डर के क्या कहने!

एक फिल्म आई थी - डरना मना है । उसके बाद आई - डरना जरूरी है । रामगोपाल वर्मा के इन शाहकारों का थिएटर पर जो भी हाल रहा हो , हमारी असल जिंदगी की फिल्म का यह ऑल टाइम हिट फॉर्म्युला है। हम डरने से इनकार करते हैं , डर के आगे जीत होने का दावा करते रहते हैं
 
संजय खाती
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इस मजेदार डर के क्या कहने!

एक फिल्म आई थी - डरना मना है । उसके बाद आई - डरना जरूरी है । रामगोपाल वर्मा के इन शाहकारों का थिएटर पर जो भी हाल रहा हो , हमारी असल जिंदगी की फिल्म का यह ऑल टाइम हिट फॉर्म्युला है। हम डरने से इनकार करते हैं , डर के आगे जीत होने का दावा करते रहते हैं
 
संजय खाती
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मुझमें वह क्या है जो बाकी में नहीं है?

बहुत दिनों से इस सवाल से जूझ रही हूं। वैसे ऐसा नहीं है कि यह सवाल मेरे जेहन में पहली बार आया है। यह कई बार आया है और बार-बार आया है। जब भी परेशान हुई तब आया , जब भी दुनिया बदलने की बात हुई तब आया और जब भी चर्चा हुई कि मरने के बाद हमें कौन और कितने दि
 
पूनम पांडे
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बवालों सी रातें

फ़सादों से दिन हैं, बवालों सी रातें जवानी की सरकश मिसालों सी रातें अदद नौकरी की फ़िकर मे कटा दिन कटें कैसे, भूँखे सवालों सी रातें उजालों मे झुलसे नजर के शज़र जब बनी हम-सफ़र, हमखयालों सी रातें खिलता अगर तेरी कुर्बत का चंदा निखर जातीं दिन के उजालों सी राते
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रामबाण

दुनिया में एक नया सौंदर्य विकसित हुआ है। यह दिन ब दिन और विकसित, और विकसित किया जा रहा है। इसके होने की इतनी तीव्र जरुरत महसूस की जा रही है कि इसे हर पल हर कोई हवा दे रहा है। यह हाव भाव का सौंदर्य है। नहीं यह तहजीब नहीं। यह मुखौटा सौंदर्य के ज्यादा क
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अनकही सी एक बात

अनकही सी /एक बात /सालती रही दिल को /कितने ही दिन /कितनी ही रातें /हिम्मत जुटाकर फिर /कह ही दिया /"लौट आओ"/और वो लौट आए /चुपचाप /बिना कुछ कहे /मानो उनको भी /था इंतज़ार /इसी छोटी सी एक बात का /जो रह जाती है अक्सर /अनकही /और तोड़ जाती है /कितने ही रिश्तों
 
mukti
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Marathis in US justify Raj demands

Wednesday, October 22, 2008, (New York)Non-resident Marathis living in the United States believe that Raj Thackeray, chief of the Maharashtra Navanirman Sena, is justified in his demand by espousing the cause of the people of Maharashtra, but say that
 
therajniti