बेबसी
दिल तेरे ही ग़मों का तलबगार है अब , दर्द गम बे-बसी से मुझे प्यार है अब।कश्ती-ए-दिल समन्दर मे महफ़ूज़ रहती, खुदगरज़ साहिलों को नमस्कार है अब।क़ातिलों का अदालत से टांका यूं , गोया मक़्तूल खुद ही ग़ुनहगार है अब।मैं चरागों को जला कर सर पे रखा हूं , दिल हवाओं से
Jun 07 2010 06:55 AM



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