पसंद करें
1
नापसंद करें

फिर भी है तलाश

दर्द है / कितना? / कोई ना पूछे/ बयां करना मुश्किल है!पर यक़ीन मानो / हम दोनों मुस्कराएं / यही इतना इसका हल है!!है नफ़रत तुम्हें मेरे वज़ूद से / मैं डरता हूं अपनी खुदगर्जियों के सबूत से /फिर भी मिलते हैं हम / ढूंढते हैं एक-दूसरे को / मान भी लो, यही हमारे
 
चण्डीदत्त शुक्ल
टैग: दिल-से