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देयर इज स्टिल समवन हू लव्ज यू

मन के दौड़ते घोड़ों का रमझोल अनियंत्रित निरंकुश सा बीते दिनों के दृश्यों को इतनी तीव्र गति से बदल रहा था कि कोई स्पष्ट घटना स्थिर नहीं हो पा रही थी, डिजिटल पटल पर आ रहे संकेतों में अवरोध उत्पन्न होने पर दिखाई पड़ने वाले पिक्सल की तरह सब कुछ उलझा-उलझा ग
 
Kishore Choudhary
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रात की नीम अंधेरी बाँहें

क्या स्नेहा नहीं जानती थी कि कितनी दुविधा में ये कदम उसकी ओर बढ़ रहे थे, बीते दिनों कि बेड़ियाँ आसानी से किसे मुक्त होने देती है अगर वह जानती थी तो फ़िर किस मिटटी की बनी थी जो इतना अपनापन दिखाने के बाद भी निरपेक्ष बनी रह जाती हर बार। श्याम वर्ण सुघड़ स्
 
Kishore Choudhary
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अपने अर्थात मुस्कुराते मकडी के जाल

फरिश्तों ने अपनी सारी जादुई शक्ति और परियों ने मोह लेने का हुनर जीतू को दे दिया तभी तो वह अपनी छत से आश्चर्यों को सजीव घटित होते हुए देखा रहा था। पड़ोस के घर का स्नानघर चौबीस इंच टीवीनुमा दिखाई दे रहा था स्नानघर में विद्या बालन के रूप सौन्दर्य को मात
 
Kishore Choudhary