दिल्ली हिन्दी ब्लॉगर मिलन : चित्रों का करिश्मा : पहने रहिये चश्मा (अविनाश वाचस्पति)
विनोद कुमार पांडेय ने तो लिख ही दी कविताचाय में भी लग रहा है उन्हें शायद तीखाहमें संभल संभल कर चलना हैअपनी राह को खुद ही चुनना हैमैं तो भूल ही गया तब क्या कह रहा थामेरी आदत है कि अक्सर भूल जाता हूंविनीत कुमार ही नहीं सभी विनीत हैहिन्दी ब्लॉगिंग के
Feb 08 2010 12:25 PM



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