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दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन : चित्रों का करिश्‍मा : पहने रहिये चश्‍मा (अविनाश वाचस्‍पति)

विनोद कुमार पांडेय ने तो लिख ही दी कविताचाय में भी लग रहा है उन्‍हें शायद तीखाहमें संभल संभल कर चलना हैअपनी राह को खुद ही चुनना हैमैं तो भूल ही गया तब क्‍या कह रहा थामेरी आदत है कि अक्‍सर भूल जाता हूंविनीत कुमार ही नहीं सभी विनीत हैहिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के
 
अविनाश वाचस्पति
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दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन : आंख में ऊंगली मत करिये (पवन चंदन)

मैं तो नहीं आ पायाइच्‍छा तो खूब रहीपर मन का कहापूरा नहीं होता।रेल विभागकभी नहीं सोतान सोने देता है।मैं तो नहीं पहुंच पायापर मेरी हाजिरी बजाईमेरे कैमरे नेउसमें यह चित्र मिला ।यह तो सही नहीं हैहिन्‍दी ब्‍लॉगिंग मेंविवाद पैदा करनाआंख में ऊंगलीकरने के है
 
पवन *चंदन*
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दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन : यह हाथ किसका है ? (अविनाश वाचस्‍पति)

दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलनमें जो भी आये थेइस हाथ से अपना हाथजरूर मिलाये थे।बतलाइये पहचानियेऔर बतलाइयेयह हाथ किसका है ?डॉ. टी एस दराल जी से पूछना मना हैवैसे हाथ नहीं पहचान पा रहे हैंतो जिनके चेहरे छिप रहे हैंउन्‍हें सामने लाइयेअरे नहीं भाईइस हाथ को मत
 
अविनाश वाचस्पति