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कालू राम की दिल्ली

कौन है कालू राम : एक ऐसा इनसान जो जीवन के तमाम अनुभवों का देख चुका है। तमाम सिद्घांतों और नैतिकता पर 'जुगाड़ तंत्रÓ किस कसद हावी होता है, उसका प्रत्यक्ष गवाह है। देश के नौकरशाही-राजनेताओं की गठजोड़ में किस कदर आगे बढऩे के लिए 'यस सर...Ó जरूरी है, इसको भी
 
सुभाष चन्द्र
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इस रात की सुबह नहीं

’लव, सेक्स और धोखा’ पर व्यवस्थित रूप से कुछ भी लिख पाना असंभव है. बिखरा हुआ हूँ, बिखरे ख्यालातों को यूं ही समेटता रहूँगा अलग-अलग कथा शैलियों में. सच्चाई सही नहीं जाती, कही कैसे जाए. मैं नर्क में हूँ. यू कांट डू दिस टू मी. हाउ कैन यू शो थिंग्स लाइक दैट ?
 
मिहिर
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दिल्ली वालों का लिटमस टेस्ट

क्या आप दिल्ली से है? यदि हाँ तो आइए जरा आपका लिटमस टेस्ट कर लेते है। हमारे पास एक झकास ’जुगाड़’ है जिससे हमे पता चल जाएगा कि आप कितने प्रतिशत दिल्ली के है। पहले एक डिस्क्लेमर : ये एक इमेल मे मुझको मिला था, मेरा इस पर कोई कॉपीराइट नही है। तो आइए हम बात
 
Jitendra Chaudhary
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दिल्ली में बसंत चिंतन यानी चिरकुटई

 दिल्ली में बसंत जब आया, तो दिल्ली की पब्लिक कोहरे से जूझ रही थी। बसंत कब आ गया, पता ही नहीं चला। सुना है कि पुराने जमाने में कई कवियों की ड्यूटी इस बात के लिए लगती थी कि जैसे ही बसंत आए, उस पर कविता कर दें। पुराने राजा महाराजा कई कवियों को सिर्फ इस
 
आलोक पुराणिक
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कोहरे ने कराई मौज

कोहरे ने बहुत अच्छा कर रखा है बहुतों के लिए। कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के पिछड़ जाने की खबरें पीछे चली गई हैं। कोहरे की खबरें ही आ रही हैं। सरकार के निकम्मेपन को कोसा जा रहा है कि रैन बसेरों का जुगाड़ ठीक ढंग से नहीं कर पा रही है सरकार। बिजली पानी के
 
आलोक पुराणिक
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कोहरे ने कराई मौज

कोहरे ने बहुत अच्छा कर रखा है बहुतों के लिए। कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के पिछड़ जाने की खबरें पीछे चली गई हैं। कोहरे की खबरें ही आ रही हैं। सरकार के निकम्मेपन को कोसा जा रहा है कि रैन बसेरों का जुगाड़ ठीक ढंग से नहीं कर पा रही है सरकार। बिजली पानी के
 
आलोक पुराणिक
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राष्ट्रमण्डल खेल : कैसा इन्फ़्रास्ट्रक्चर ? किसके लिए ? : सुनील

पिछले भाग से आगे : यह कहा जा रहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए जो इन्फ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, वह बाद में भी काम आएगा। लेकिन किनके लिए ? निजी कारों को दौड़ाने और हवाई जहाज में उडने वाले अमीरों के लिए तो दिल्ली विश्व स्तरीय शहर बन जाएगा। (वह भी कुछ समय के
 
अफ़लातून
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पानी की नहीं, तलवार की धार

कंगाली में आटा गीला - यह कहावत राजधानी में पानी की स्थिति पर जरूर कही जा सकती थी लेकिन परेशानी यह है कि आटा गीला करने के लिए भी तो पानी चाहिए। अगला विश्वयुद्ध भले ही पानी के लिए हो या न हो लेकिन दिल्ली और हरियाणा के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। इसे दिल्ली
 
दिलबर गोठी
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पानी की नहीं, तलवार की धार

कंगाली में आटा गीला - यह कहावत राजधानी में पानी की स्थिति पर जरूर कही जा सकती थी लेकिन परेशानी यह है कि आटा गीला करने के लिए भी तो पानी चाहिए। अगला विश्वयुद्ध भले ही पानी के लिए हो या न हो लेकिन दिल्ली और हरियाणा के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। इसे दिल्ली
 
दिलबर गोठी
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इस साल दिल्लीवालों का भविष्यफल

2010 में दिल्लीवासियों का भविष्यफल इस प्रकार रहेगा -मेषकैश जेब में कम ही बचेगा, क्योंकि इस साल अरहर दो सौ रुपये किलो और टमाटर तीन सौ रुपये के दस ग्राम मिलेंगे। वृषआपको पूरे साल तमाम आइटमों के भाव मरखने बैल की तरह दिखाई देंगे। इसे लेकर परेशान ना हों। मौत
 
आलोक पुराणिक
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रात में निकलें जुलूस और 7 बजे हो ऑफिस

लो, फिर जाम हो गई दिल्ली। सुबह से लेकर देर रात तक जाम ही जाम। कोई जुलूस निकल रहा है, कहीं पाइपलाइन फट गई है, तो कहीं सड़क खुदी पड़ी है। कभी फ्लाईओवर बनने की वजह से है जाम तो कहीं मेट्रो के काम के नाम। कभी शादियों का सीजन दिल्ली वालों के लिए बन जाता है
 
दिलबर गोठी
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दिल्ली का एक सुप्रसिद्ध हरित क्षेत्र----कहाँ है ये?

आइये आपको सैर कराते हैं, दिल्ली के एक सुप्रसिद्ध हरित क्षेत्र की ---इस जगह को पहचानिए। यदि नहीं भी पहचान पायें तो कोई बात नहीं, दो दिन बाद अंतर्मंथन पर इसका विस्तृत विवरण पढ़ सकते हैं।घना जंगल, शहर के बीचों बीच ।और भी घना , लेकिन पगडण्डी तो है।ये तो और भी
 
डॉ टी एस दराल
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कॉमनवेल्थ गेम्स: दिल्ली के हाथ में देश की नाक

कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर हर तरफ चिंता है। प्रधानमंत्री भी चिंतित हैं और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी। मेयर ने तो सभी उद्योगों को बंद करने की अभी से सलाह दे दी है ताकि विदेशी आएं तो उन्हें दिल्ली का दामन प्रदूषण से काला महसूस न हो। कम से कम ऊपरी तौर पर ही
 
दिलबर गोठी
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फिर मिलेंगे चलते चलते...

अरे! तुम...मेरे दाहिने ओर से आई एक मीठी सी आवाज ने अचानक मेरा ध्यान उचटा दिया। तुम यहां कैसे? लोकल हो क्या? यहां कोई काम से आए हो? क्या करते हो?एक मिनट के भीतर ही इतने सारे सवालों ने मुझसे उस 24-25 की युवती का परिचय बढ़ाना शुरू कर दिया।मैं बिल्कुल बेवाक
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यहां भारतीयों की एंट्री बैन है!

शुक्रवार देर रात मेरे दोस्त रमित (बदला हुआ नाम) ने मुझे फोन किया। वह काफी उत्तेजित लग रहा था। उसने कहा , ' जानते हो हागेन डाज़ का आउटलेट दिल्ली में खुल गया है। ’ मैंने मज़ाक में कहा , ' बढ़िया है , अब तुम एक आइस्क्रीम पर पहले के मुकाबले कई गुना ज्याद
 
राजेश कालरा
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अंधेर नगरी में मौसेरे भाइयों का राज

अंधेर नगरी चौपट राजा' वाली कहानी तो आपने सुनी ही होगी जिसमें राजा का फरमान जारी होता है कि जिसके गले में फांसी का फंदा आ जाए, उसे ही फांसी पर लटका दो। रजवाड़े तो अब नहीं हैं लेकिन सरकारें मौजूद हैं और राजाओं की लंबी कतार भी है। इन राजाओं को हर बार जन
 
दिलबर गोठी
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लौट के आ जाएँ कुछ दिन बीते

बंगलौर में पढ़ने लगी है हलकी सी ठंढकोहरे को तलाशती हैं आँखेंमेरी दिल्ली, तुम बड़ी याद आती होपुरानी हो गई सड़कों पर भीनहीं मिलता है कोई ठौरनहीं टकराती है अचानक सेकोई भटकी हुयी कविताकिसी पहाड़ी पर से नहीं डूबता है सूरजपार्थसारथी एक जगह का नाम नहींइश्क पर
 
poemsnpuja
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यमुनापार दिल्ली इतनी दूर क्यों?

नदिया के पार' - भले ही यह किसी उपन्यास, फिल्म या कहानी का टाइटल प्रतीत होता हो लेकिन यमुनापार में रहने वाले लाखों लोगों के लिए यह किसी कड़ी कसरत का नाम है। उनके लिए आज भी इस पार या उस पार जाना उतना ही मुश्किल है जितना 100 साल पहले किसी नाव पर बैठकर न
 
दिलबर गोठी
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन वाया करनाल

तमाम दिल्लीवासियों के लिए जारी खास ट्रैफिक एडवाइजरी इस प्रकार है - 1 - तमाम रैलियों और रैलों के चलते लक्ष्मीनगर से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले वाया करनाल जाने के लिए तैयार रहें। आईटीओ पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाएगा। डायवर्ट होते-होते बंदा करना
 
आलोक पुराणिक
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दिल्ली अगर गंदी है तो दोषी आप और हम हैं...

सब इसे गरियाते रहते हैं। हर तीसरा शख्स इसकी कमियां गिनाता दिख जाएगा। बातचीत में जरा-सा छेड़ने भर की देर है, इसकी खिंचाई करते समय हर कोई लाठी लेकर दौड़ पड़ता है। आप कहेंगे - ये कौन? अरे दिल्ली, और कौन। पूछिए, दिल्ली कैसी है? दिल्ली-बॉर्न कहेंगे,
 
पूजा
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दिल्ली अगर गंदी है तो दोषी आप और हम हैं...

सब इसे गरियाते रहते हैं। हर तीसरा शख्स इसकी कमियां गिनाता दिख जाएगा। बातचीत में जरा-सा छेड़ने भर की देर है, इसकी खिंचाई करते समय हर कोई लाठी लेकर दौड़ पड़ता है। आप कहेंगे - ये कौन? अरे दिल्ली, और कौन। पूछिए, दिल्ली कैसी है? दिल्ली-बॉर्न कहेंगे,
 
पूजा
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन वाया करनाल

तमाम दिल्लीवासियों के लिए जारी खास ट्रैफिक एडवाइजरी इस प्रकार है - 1 - तमाम रैलियों और रैलों के चलते लक्ष्मीनगर से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले वाया करनाल जाने के लिए तैयार रहें। आईटीओ पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाएगा। डायवर्ट होते-होते बंदा करना
 
आलोक पुराणिक
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साले, लड़कियों का ठेकेदार बनता है...

ब्लूलाइन बस में स्कूली ड्रेस पहने बैठीं दो लड़कियां। उम्र 13-14 साल रही होगी। उनके ठीक पीछे एक काफी बूढ़ी महिला। बस में 20-22 लोग और भी बैठे थे। सात-आठ मुस्टंडे भी बस में सवार थे। उनमें से दो लड़के , पूरी तरह सहमी हुई लड़कियों के सामने खड़े होकर उनसे
 
शिवेंद्र चौहान
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बस में नहीं बस, बस में है कार

अगर दिल्ली की चिंता करने वाले किसी भी व्यक्ति से यह पूछा जाए कि सड़कों पर बढ़ती गाड़ियों की तादाद पर कैसे काबू पाया जाए तो वह सीधा-सा जवाब देगा कि अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट लोगों को आसानी और सस्ते में सुलभ हो जाए तो लोग अपनी गाड़ी को गराज से बाहर निकालन
 
दिलबर गोठी
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तू दाल-दाल, मैं पात-पात

महंगी दाल पर मीडिया में इतना कुछ लिखा जा चुका है कि उसे मिला दें तो दाल-ग्रंथ बन जाए। लेकिन आज आखबार में दिल्ली सरकार ने एक विज्ञापन दिया तो लगा कि इस दाल-ग्रंथ में संपुट * तो जोड़ा ही जा सकता है। विज्ञापन में लिखा है : पीली मटर दाल – वाजिब दाम पर उच
 
शिवेंद्र चौहान
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विद्या रानी की कसम

याद है आपको... बचपन में हम कहा करते थे - विद्या रानी की कसम...और जब किताब से पांव छू जाता था तो उसे तीन बार माथे से लगाकर चूमते थे...कुछ लोग तो 7 बार माथे से लगाते और फिर 7 बार चूमते थे...अजीब दुनिया थी किताबों की...आपको किताबों की अलग सी दुनिया की स
 
विवेक आसरी
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हिन्‍दी टाकीज-सिनेमा ने मुझे कुंठाओं से मुक्‍त किया-श्रीधरम

हिन्‍दी टाकीज-49 श्रीधरम झंझारपुर के मूल निवासी हैं। इन दिनों दिल्‍ली में रहते हैं । हिन्‍दी और मैथिली में समान रूप से लिखते हैं। उनकी कुछ किताबें आ चुकी हैं। कथादेश और बया जैसी पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े हैं। बात-व्‍यवहार में स्‍पष्‍ट श्रीधरम म
 
chavanni chap
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चमत्कार को नमस्कार

राजीव तनेजा*** "ओ...बड़े दिनों में खुशी का दिन आया.... ओ...बड़े दिनों में खुशी का दिन आया.... आज मुझे कोई ना रोके... बतलाऊँ कैसे कि मैँने क्या पाया.... हो बड़े दिनों में..... "याहू!.... वो मारा पापड़ वाले ने"... "क्या हुआ तनेजा जी?...
 
राजीव तनेजा
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नुक्‍कड़ ब्‍लॉग/ब्‍लॉगर गोष्‍ठी का आयोजन

यह किया जाना है तय कि मिलें ब्‍लॉगर्स दिल्‍ली में। करें शुरूआत मिलने की जुलने की। न कि लड़ने की भिड़ने की फिर गिरने की। क्‍या दिल्‍ली में नेहरू प्‍लेस के आस्‍था कुंज में मिलना रहेगा ठीक। रहे ठीक तो लगे कीबोर्ड यह भी बतलायें कि कब मिलें कितनी देर मिले
 
अविनाश वाचस्पति