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सुर देवता मन्ना दा को जन्मदिन पर आदरांजली...

कडी १ये बात तो पक्के है, कि इतने दिनों गायब होने के बाद जब फ़िर से आपके संम्मुख आया हूं तो मुआफ़ी तो मांगना ज़रूरी है.कितनी बार आपसे वादे किये, अपने आप से कसमें खायी,ब्लोग जगत के मेरे सुरीले परिवार से प्यार और वफ़ा का वास्ता भी दिया, मगर फ़िर वही ढाक के
 
दिलीप कवठेकर
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भारतीय रेल में सुहाना सफ़र -- मेरे सपनों की रानी -डबल डेकर -कब आयेगी तू?

दो चार दिनों पहले, दो ख़बरें प्रमुखता से छा गयी थी टी व्ही पर,एक तो सचिन का एक दिवसीय क्रिकेट में विश्व एक दिवसीय क्रिकेट का पहला दोहरा शतक, और दूसरी ममता दीदी का रेल बजेट.पहले तो सचिन को लाख लाख बधाईयां. वाकई बहुत ही बढियां काम किया है और देश का नाम
 
दिलीप कवठेकर
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आल इज़ स्टिल वेल- इजिप्ट में एक्सिडेंट

मुसाफ़िर हूं यारों.. ना घर है ना ठिकाना, मुझे चलते जाना है, बस चलते जाना....जीवन की इस सच्चाई से रूबरू हुआं हूं अभी अभी... जी हां.पिछले रविवार को अचानक इजिप्ट की राजधानी काइरो या अल-काहिरा जाना पडा, प्रोजेक्ट के सिलसिले में. अब तो आना जाना लगा ही रहेगा,
 
दिलीप कवठेकर
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सुन मेरे बंधू रे, सुन मेरे मितवा, सुन मेरे साथी रे

सचिन्द्र देव बर्मन, ये नाम मेरी पिछली पोस्ट पर चमक रहा था. अब भी मेरे मन में घुला घुला सा, गुनगुनाया सा नाच रहा है. कुछ भी लिख दूं, उनके लिये अधूरा सा लगता है. और तो और, जब उनकी धुनों पर रचे गये गीत जब मैं गुनगुनाता हूं, तो वे खुद मुझमें परकाया प्रवे
 
दिलीप कवठेकर
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सचिन दा और मन्ना दा की जुगलबंदी - कव्वाली - किसनें चिलमन से मारा...

सचिन देव बर्मन एक ऐसा नाम है, जो हम जैसे सुरमई संगीत के दीवानों के दिल में अंदर तक जा बसा है. मेरा दावा है कि अगर आप और हम से यह पूछा जाये कि आप को सचिन दा के संगीतबद्ध किये गये गानों में किस मूड़ के, या किस Genre के गीत सबसे ज़्यादा पसंद है, तो आप क
 
दिलीप कवठेकर
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किशोर दा के कॊलेज जीवन के संस्मरण!- ये दिल ना होता बेचारा,कदम ना होते आवारा-

आपको शायद याद ही होगा कि हमारे हर दिल अज़ीज़ गायक शेहंशाह जनाब रफ़ी साहब की पुण्यतिथी ३१ जुलाई को मैने श्रद्धांजली के तौर पर एक विडीयो बनाया था --नाचे मन मोरा मगन तिकता धिगी धिगी.... (http://dilipkawathekar.blogspot.com/2009/07/blog-post_30.html) वह तो
 
दिलीप कवठेकर