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आईये हम अपने ब्लाग मित्र के बारे कुछ सुध ले...

दो चार दिनो से मन मे विचार ऊठ रहे थे कि हमारे ब्लांगर मित्र श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के बारे मै जानने के लिये मेरे पास ना तो उन का कोई फ़ोन ना० ही है, ओर ना ही ई मेल ,भगवान से यही प्राथना करता हुं वो जल्द ठीक हो कर फ़िर से हमारे बीच आये, अगर किसी के पास
 
राज भाटिय़ा
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गाऊ माता????

भारत मै अगर कोई गाय को मार दे तो धर्म के ठेके दार आसमान सर मै ऊठा लेते है, लेकिन पुरी दुनिया मै सब से ज्यादा दुर्दशा गाय की भारत मै ही होती है, वेसे भी अब लोग जब अपने मां बाप को ही घर से निकाल देते है धक्के मार कर तो यह गाऊ माता कोन है???अब बात करते है
 
राज भाटिय़ा
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हुक्का

नमस्कार, आप सभी को,हुक्का बिलकुल आम है, शहरो मै तो यह बहुत कम दिखता होगा, शायद उन्ही जगह पर जहां लोग गांव से आये हो ओर साथ मै कुछ यादे ले आये,हुक्का कहने मात्र को ही एक हुक्का है लेकिन इस के साथ एक बहुत बडी समाज कि वय्वस्था जुडी है.यहां जर्मनी मै , मेरे
 
राज भाटिय़ा
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छोटी छोटी बाते... अर्थ बहुत गहरे

पिछले शुक्र बार को बच्चे बोले की उन के दोस्त ने एक पार्टी रखी है, वहा जरुर जाना है, ओर दोनो भाई तेयार हो गये, मेने उन्हे कहा कि तुम दोनो को छोड आता हुं, ओर जब भी पार्टी खत्म हो मुझे फ़ोन कर देना मे तुम्हे लेने आ जाऊंगा,बच्चे बोले पापा हम अब कार चला सकते
 
राज भाटिय़ा
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जनाब क्या खायेगे? चलिये खुद ही देख ले क्या क्या मिलता है यहां

यह मुझे Mohan Vashisth जी ने मेल से भेजी ओर मेरे दिल को छुगई, मेने इसे आगे मेल करने कि व्जाय इस की पोस्ट बना दी..,,आज सभी फ़ोटो गायब हो गये जी.... पता नही कहांजाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ? ............ ... ........... .....थोड़ा
 
राज भाटिय़ा
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दिल्ली वालो कुछ मदद तो करो ना?

मै शायद जनवरी या फ़रवरी मै एक सप्ताह के लिये भारत आऊ, इस बार भी अकेला ही आ रहा हुं, अभी टिकट नही ली, ओर मै दिल्ली ओर रोहतक मै ही रुकना चहुंगा, दिल्ली मै मेरे सभी रिश्ते दार है, ससूराल भी दिल्ली मै ही है, यार मित्र , दोस्त भी बहुत है...... लेकिन मै किस
 
राज भाटिय़ा
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ऒऎ भाई साहब जी क्या हाल है....

बात आज से बहुत पुरानी है, एक दिन मै ओर मेरी बीबी शहर मै खरीदारी कर रहे थे, गर्मियो के दिन थे, सो उस दिन बीबी ने अपनी भारतिया पहनावा ही यानि साडी पहन रखी थी, ओर जब हमारी बीबी साडी पहन कर बाजार जाती है तो लोग बहुत प्यार ओर इज्जत से देखते है, बस सब को प
 
राज भाटिय़ा
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धन्यवाद ब्लांगबाणी तेरा

ब्लांगबाणी ओर इस के संचालको को मेरा दिल से धन्यवाद, आप ने हम सब का मान इज्जत रख ली, सभी बेचेन हो गये थे, ओर मेरे जेसे तो बहुत ज्यादा थे, क्योकि हम आप सब ब्लांअबाणी को अपना मायका मानते है, जहा सब इकट्टे मिल जाते है, ओर कल का दिन कितना भारी गुजरा, यह ह
 
राज भाटिय़ा