मात पे भी मेरी बधाई दे दी...------->>>>>>>दीपक 'मशाल'
मैंने चाहा था उम्र भर के लिएउसने जन्मों की जुदाई दे दीसाथ रहने का वादा करकेमुझको लोगों की दुहाई दे दीक़ैद होकर मिरे ही दिल मेंमेरी धड़कन को रिहाई दे दीइक करम माँगा था उल्फत मेंतुमने सारी ही खुदाई दे दीआके जलसे में मेरी खुशियों केतुमने तोहफे में रुलाई
Feb 05 2010 04:59 AM



Shuffle








