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मात पे भी मेरी बधाई दे दी...------->>>>>>>दीपक 'मशाल'

मैंने चाहा था उम्र भर के लिएउसने जन्मों की जुदाई दे दीसाथ रहने का वादा करकेमुझको लोगों की दुहाई दे दीक़ैद होकर मिरे ही दिल मेंमेरी धड़कन को रिहाई दे दीइक करम माँगा था उल्फत मेंतुमने सारी ही खुदाई दे दीआके जलसे में मेरी खुशियों केतुमने तोहफे में रुलाई
 
दीपक 'मशाल'
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हाल-ए-दिल

कौन इस राह से गुज़रता हैदिल यूं ही इंतज़ार करता हैदेख कर भी न देखने वालेदिल तुझे देख देख डरता हैशहर-ए-गुल में कटी है सारी रातदेखिए दिन कहाँ गुज़रता हैध्यान की सीढियों पे पिछले पहरकोई चुपके से पांव धरता हैदिल तो मेरा उदास है नासिरशहर क्यूँ साएँ साएँ करता
 
गजेन्द्र बिष्ट
टैग: दिल
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दिल टूटने से, और बढ़ गई दिलों की दूरियाँ

दिल टूटने से, और बढ़ गई दिलों की दूरियाँ पर कोई क्या बताए क्यों थी दिलों में दूरियाँ दिल में रख छोड़ा था एक ख्याब सुनहरा सा जिनमे हमेशा वो रहा जिसके ख्याबों में मैं ही कहाँ था? और क्या कहें,  क्या रही हमारी मजबूरियाँ
 
Sudhir (सुधीर)
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दिल से उनकी याद ही न जाए तो क्या करें?

चाहा उन्हें हमने दिल से पर रास न आई उसे हमारी मोहब्बत तो क्या करें। दुवाओं में मेरी असर तो है प्रिंस पर उन पर असर न हो तो क्या करें। बात एक दिन की हो तो रास्ता बदल लें पर वो रोज रास्ते में आए तो क्या करें। याद में उनकी तारे गिना किए रात भर अब दिन में
 
राजकुमार ग्वालानी
टैग: दिल