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दारू की खुमारी और देवता की याद

सबसे पहले माफ़ी एक लम्बे विराम के लिए.. एक दोस्त के यहाँ दारू की दावत थी. पांच लोग थे हम. पीने का कारबार शुरू हुआ. थोडी बहुत झुनकी सवार होने लगी थी. एक ने गुनगुनाना शुरू किया, "गुलाबी आँखे, जो मैंने देखी...". मैंने बीच में टांग अड़ाई. भाई! आँखे झील सी
 
राहुल कुमार