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वैदिक युग में दाम्पत्य बधन ----डा श्याम गुप्त ....
(डा श्याम गुप्त ) विशद रूप में दाम्पत्य भाव का अर्थ है,दो विभिन्न भाव के तत्वों द्वारा अपनी अपनी अपूर्णता सहित आपस में मिलकर पूर्णता व एकात्मकता प्राप्त करके विकास की ओर कदम बढाना। यह सृष्टि का विकास भाव है ।प्रथम सृष्टि का आविर्भाव ही प्रथम दाम्पत्य भाव
Apr 26 2010 12:55 PM



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