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‘सारे हिन्दू धार्मिक ग्रंथों को तोप से उड़ाकर उनका पुर्नलेखन होना चाहिए।

(युवा दख़ल की यह सौवीं पोस्ट सामाजिक न्याय के प्रखर प्रवक्ता डा अम्बेडकर के विचारों पर केन्द्रित  करते हुए हमें अत्यंत संतोष का अनुभव हो रहा है। एक नौसिखुए की तरह शुरुआत करके हमारा संगठन और ब्लाग इस समयावधि में काफ़ी परिपक्व हुए हैं। इस अवसर पर हम
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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बहुजन राजनीति और अस्मिता

करीब ढाई साल पहले उत्तरप्रदेश में बसपा की जीत ने दलितों समेत कई लोगों को यह भ्रम बनाए रखने का अवसर दिया था कि ब्राह्मणों तथा अन्य सवर्णों को मायावती का नेतृत्व स्वीकार है. वे मान चुके थे कि करीब सवा सौ साल पहले उत्पीड़ित समुदाय के सम्मान एवं समानता क
 
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