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गिरगिट की तरह रंग बदलती बुद्धिजीवी विचारधारा

राजधानी में इन दिनों गुरुकुल बाल आश्रम और राजीव ब्रिगेड के चर्चे आम और खास दोनों जगहों पर होने लगे हैं। कभी तो बुद्धिजीवी वर्ग राजीव ब्रिगेड की तारीफें करते करते नहीं थकता है, तो कभी वही वर्ग इसे अपने नाम को बदनाम करता हुआ दिखाई देता है। बुद्धिजीवियों के
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कठपुतली की तरह नचाती जंग

गुरुकुल बाल आश्रम में बच्चे बेचे जाने की घटना धीरे-धीरे नए राज खोलते जा रही है। प्रकरण को लेकर यह माना जा रहा है कि आश्रम में नारायण राव के द्वारा की गई गलती या अपराध का फायदा मीडिया जगत की दो बड़ी संस्थान आपसी रंजिशों का बदला लेने के लिए इस्तेमाल कर रही
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अबोध बच्ची को लेकर शुरू हुआ पत्रकारों के बीच वैचारिक द्वंद

एक ओर जहां देश-भर में महिला आरक्षण को लेकर चर्चाएँ जोर-शोर से की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की राजधानी में 20 दिनी बच्ची को बेचे जाने का मामला गर्म है। इस मुद्दे ने प्रदेश के पत्रकार या बुद्धिजीवी वर्ग को दो भागों में बांट दिया है। इनमें से एक
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दल्ले भी लिखने लगे ब्लॉग

ब्लाग जगत के लिए एक दुखदाई खबर यह है कि इसमें अब दल्ले भी शामिल हो गए हैं। अखबारों की काली श्याही को दागदारह करने वाले यह दल्ले ब्लागरों को भी अब बदनाम करने में तुल गए हैं। इस जगत में यह चर्चा आम रहती है कि किसी का लेख कोई दूसरा ब्लागर अपने में प्रकाशित
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पत्रकार को तवायफ बनाने का षणयंत्र

पत्रकारिता क्षेत्र का अनुभव हालाकि मुझे बेहद कम है, लेकिन इतने समय में मैं यह जरूर समझ गया हूं कि अब एक पत्रकार से तवायफ की तरह काम लिया जा रहा है। तवायफ और पत्रकार में अब अंतर सिर्फ यह रह गया है कि तवायफ रुपए लेकर अपने जिस्म को खरीदार को सौंप देती है,
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मीडिया के चुतियापे का समय

यह मीडिया के चुतियापे का समय है। इस शब्द का इस्तेमाल इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि अपनी हरकतों से मीडिया अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। चुनाव में हिन्दी के कई ..बड़े अख़बारों ने पैसे लेकर विज्ञापन नुमा न्यूज़ छापी। पाठकों को बेवकूफ समझा। एक ही पेज पर एक ही स
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