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मैं हूँ यही मेरा है नव-निर्माण…

नियती नहीं मेरा किसी सोये हुए इतिहास का उद्घोषणा प्रकृति का नवीन वर्तमान हूँ… मन की उदास वृत्ति बेचैन शोक का नाद नहीं राह दृष्टांत धवल ज्योति का पूँज हूँ … गहन अंधकार निस्तेज आवरण अविद्या शरणार्थी नहीं प्रस्फुटित काया प्रज्ञा भूषित क्रांति का पुत्र ह
 
Divine India
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आशा का नभ है विशाल…।

जाने कितनी ही सुबह बीत गई रात को तकने के बहाने पर याद रहा मेरा यही साथी जो साथ चला था तन्हाइयों में उस वक्त… अपने फिल्म को लेकर इतना व्यस्त हो गया हूँ कि कब रात आती है और चली जाती है पता ही नहीं चलता। वैसे मेरी फिल्म का Promo सीरिफोर्ट ऑडिटोरियम में
 
Divine India