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इंसान सस्ता हो रहा है-क्षणिकायें

महंगाई आसमान पर चढ़ गयी है, इसलिये नैतिकता तस्वीर में जड़ गयी है। चीजों की तरह इंसान भी बिकने लगा है, मांग आपूर्ति के नियम से अनुसार जरूरत से ज्यादा है बाज़ार में इसलिये मेहनत की कीमत पड़ रही है। ——— आधुनिकता के नाम पर इंसान सस्ता हो रहा
 
दीपक भारतदीप
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चेतना श्रृंखला का समाहार और दर्शन का संश्लेषक कार्य

हे मानवश्रेष्ठों,पिछली बार हमने चिंतन और चेतना को कंप्यूटर के संदर्भ में देखने की कोशिश की थी, और विचार किया था कि क्या कंप्यूटर सोच-विचार कर सकता है?  इस बार यहां चेतना पर शुरू हुई इस श्रृंखला का समाहार प्रस्तुत किया जा रहा है तथा दर्शन के संश्लेषक
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हिन्दू धर्म दर्शन-पति पत्नी में झगड़ा न करायें

मद्यपापनं कलहं पुगवैरं भार्यापत्योरंतरं ज्ञातिभेदम्। राजद्विष्टं स्त्रीपुंसयोर्विवादं वज्र्यान्याहुवैश्चं पन्थाः प्रदुष्टः।। हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि शराब पीना, कलह करना, अपने समूह के साथ शत्रुता, पति पत्नी और परिवार में भेद
 
दीपक भारतदीप
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हम न मानेंगे, हमारे मूरिसान लंगूर थे

इस चिट्ठी में चर्चा है कि, हिन्दुओं में विकासवाद का क्यों नहीं विरोध हुआ, और क्या भगवान विष्णु का वामन अवतार होमो फ्लॉरेसिएन्सिस (जिसके अस्थि पंजर इंडोनीशिया में मिले हैं) से प्रेरित है।इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट
 
उन्मुक्त
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पश्येम शरदः शतम् … – अथर्ववेद की प्रार्थना

वेदों में जहां एक ओर कर्मकांडों से जुड़े मंत्रों और लौकिक उपयोग की बातों का उल्लेख मिलता है, वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक दर्शन से संबद्ध मंत्र एवं अदृश्य शक्तियों की प्रार्थनाएं भी उनमें देखने को मिलती हैं । मैंने अभी पूरा अथर्ववेद नहीं देखा है, किंतु जितना
 
योगेन्द्र जोशी
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अपने प्यार को ढ़ूंढिये

विश्वविद्यालयों का दीक्षांत समारोह, न उसके विद्यार्थियों के लिये पर विश्वविद्यालय के लिये भी महत्वपूर्ण होता है। विद्यार्थी इस दिन अपने नये जीवन में प्रवेश करते हैं और विश्वविद्यालय के लिये यह मील का पत्थर होता है। इस दिन, हर विश्विद्यालय किसी खास
 
उन्मुक्त
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अपने प्यार को ढ़ूंढिये

विश्वविद्यालयों का दीक्षांत समारोह, न उसके विद्यार्थियों के लिये पर विश्वविद्यालय के लिये भी महत्वपूर्ण होता है। विद्यार्थी इस दिन अपने नये जीवन में प्रवेश करते हैं और विश्वविद्यालय के लिये यह मील का पत्थर होता है। इस दिन, हर विश्विद्यालय किसी खास
 
उन्मुक्त
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यावत् जीवेत् सुखं जीवेत् …: चार्वाक दर्शन (लोकायत)

मानव जीवन का सबसे प्राचीन दर्शन (philosophy of life) कदाचित् चार्वाक दर्शन है, जिसे लोकायत या लोकायतिक दर्शन भी कहते हैं । लोकायत का शाब्दिक अर्थ है ‘जो मत लोगों के बीच व्याप्त है, जो विचार जनसामान्य में प्रचलित है ।’ इस जीवन-दर्शन का सार निम्नलिखित
 
योगेन्द्र जोशी
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धर्म बनाम दर्शन

भारतीय परंपरा में नास्तिक का अभिप्राय वेद को प्रामाण्य मानने से है. तदनुसार वेदों को आप्तवचन—ऊपर से उतरा हुआ, अपौरुषेय माना जाता है. परंतु व्यवहार में आस्तिक या नास्तिक का अर्थ क्रमशः ईश्वर को मानना या न मानना रह गया है. भारतीय दर्शन परंपरा में ऐसे भी
 
adhyatan
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सफलता हमेशा काम के बाद आती है

यह चिट्ठी ई-पाती श्रंखला की कड़ी है। यह श्रंखला, नयी पीढ़ी की जीवन शैली समझने, उनके साथ दूरी कम करने, और उन्हें जीवन मूल्यों को समझाने का प्रयत्न है। यदि लगन है, काम करने का ज़स्बा है तो सफलता कदम चूमेगी। मुन्ने राजा तीन दशक पहले, तुमने हमारे जीवन मे
 
उन्मुक्त
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26/11 पर मातम मनाने का कंपटीशन

यूनिसेफ द्वारा जारी 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रेन' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पांच साल से कम उम्र के पांच हजार बच्चों की  हर रोज मौत होती है। यह मृत्यु ऐसे साधारण कारणों से होती है, जिसे अच्छी खुराक दे कर या समय पर इलाज दे कर रोका जा स
 
बालमुकुंद
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26/11 पर मातम मनाने का कंपटीशन

यूनिसेफ द्वारा जारी 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रेन' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पांच साल से कम उम्र के पांच हजार बच्चों की  हर रोज मौत होती है। यह मृत्यु ऐसे साधारण कारणों से होती है, जिसे अच्छी खुराक दे कर या समय पर इलाज दे कर रोका जा स
 
बालमुकुंद
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संरचनावाद के योद्धा लेवी स्ट्रॉस नहीं रहे

संरचनावादी मानवशास्त्री क्लाउद लेवी स्ट्रॉस नहीं रहे। सौ साल के थे। इस दार्शनिक और मानवशास्त्री ने दर्शन की पूरी समझ पर गहरा असर डाला है। पचास-साठ के दशक में जब युरोप के मशहूर दार्शनिक सात्र कमजोर हो रहे थे तब लेवी स्ट्रॉस के विचार,दर्शन से लेकर साहि
 
समकालीन जनमत
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कठोपनिषद् के नीति वचन – श्रेयस् (कल्याणप्रद) एवं प्रेयस् (चित्ताकर्षक) में चुनाव

कठोपनिषद् में ऋषिकुमार बालक नचिकेता और यम देवता के बीच प्रश्नोत्तरों की कथा का वर्णन है । नचिकेता की शंकाओं का समाधान करते हुए यम उपदेश देते हैं कि मनुष्य दो प्रकार के कर्मों से बंधा रहता है, प्रथम वे जो कल्याणकारी होते हैं और द्वितीय वे जो उसको प्रि
 
योगेन्द्र जोशी
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दार्शनिक संकल्पना - भूतद्रव्य ( Matter ) के मंतव्य

हे मानवश्रेष्ठों, श्रृंखला पर लौटते हैं। जैसा कि पिछली चर्चाओं में हमने देखा था कि दर्शन का बुनियादी सवाल भूतद्रव्य (Matter) और चेतना (Consciousness) के सवाल, इनके अंतर्संबंधों और प्राथमिकता के सवाल से जुड़ा था। अतएव यह समीचीन होगा कि इन संकल्पनाओं, भ
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आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया

त्रिवेन्द्रम के आट्टूकल भगवती मंदिर में पोंगाला चढ़ाया जाता है। इस चिट्ठी में उसी की चर्चा है।हम लोग कुमाराकॉम से लगभग सवा ग्यारह बजे त्रिवेन्द्रम के लिए निकले थे। वहाँ से त्रिवेन्द्रम पहुंचने के लिए लगभग चार घण्टें लगते है। लेकिन उस दिन त्रिवेन्द्रम के
 
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कोई वकील क्यों बनना चाहता है?

is chitthi mein vakeel banane kee prenna kyon aur kaise milee, per aayojit pratiyogita ke baare mein charchaa hai. This post talks about competition regarding inspiration to become lawyers. इस चिट्ठी में वकील बनने की प्रेणना क्यों और कैसे मिली, पर आयोजित
 
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न्यायालय ५ बजे बन्द होता है

This article is about inquiry being done against Ms. Sharon Keller Principal Judge Criminal Appellate Court Texas for refusing to keep the court open for urgent matter in death row appeal. yeh chitthi sushree sharon keller, mukhay nayayadhish criminal
 
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बाप रे बाप, हिन्दुवों के इतने भगवान - उलझन नहीं होती?

लीसा से मेरी मुलाकात वियाना में कॉन्वेंट में हुई थी। मैंने वायदा किया था कि उसके और मेरे बीच बीच ई-मेल की चर्चा करूंगा। यह चिट्ठी उसमें से एक है। हिन्दू धर्म जीने का तरीका है और उन्हीं तरीकों को आसानी से समझने के लिये कथायें और देवी देवाताओं को रचा गया
 
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अरे! ऐसा भी चित्र बनाया जा सकता है?

स्कॉट वेड गन्दी कार की खिड़कियों के शीशे में सुन्दर चित्र बनाते हैं। मैं नहीं समझता था कि कोई इस तरह के चित्र भी बना सकता है। उनकी कार में बने चित्रों को देख कर, अक्सर लोग अपनी कार से उतर कर चित्र खींचने आ जाते हैं। उनके बनाये गये नीचे के चित्र ने, [...]
 
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बुद्धवचनामृत, अश्वघोषविरचित बुद्धचरितम् से – ऐहिक संबंधों का अस्थायित्व

प्राचीन संस्कृत साहित्य में ‘बुद्धचरितम्’ नामक एक काव्य उपलब्ध है । मेरे पास इसकी एक प्रति है, श्री सूर्यनारायण चौधरी द्वारा संपादित-अनुवादित एवं मोतीलाल बनारसीदास द्वारा प्रकाशित । ग्रंथ-परिचय में बताया गया है कि काव्य की पूरी मूल प्रति उपलब्ध नहीं है ।
 
योगेन्द्र जोशी
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भारतीय धर्म-दर्शन की परंपरा और भक्ति आंदोलन

भारतीय परंपरा में जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए है. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष. ये जीवन का मूल तत्व या पदार्थ भी हैं, जिन्हें प्राप्त कर लेना मानवजीवन की वास्तविक उपलब्धि कही जा सकती है. इनमें से पहले तीन की प्राप्ति इसी जीवन में संभव है, जबकि चौथे के
 
kashyap omprakash
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मौलिकता हमेशा दूसरे की नकल होती है

यह चिट्ठी ई-पाती श्रंखला की कड़ी है। यह श्रंखला, नयी पीढ़ी के साथ जीवन शैली को समझने, और उसके एवं अपने बीच दूरी कम करने का प्रयत्न है।  पापा आपकी तबियत ठीक नहीं है और आप आजकल आराम कर रहे हैं। मैं आपके पास एक मग, कुछ संगीत की सीडियां, मग, और कुछ
 
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